नई शिक्षा नीति पर डीटीए ने कहा- शिक्षण संस्थानों को स्व वित्त पोषित बनाने पर है जोर
नई शिक्षा नीति पर डीटीए ने कहा- शिक्षण संस्थानों को स्व वित्त पोषित बनाने पर है जोर
दिल्ली

नई शिक्षा नीति पर डीटीए ने कहा- शिक्षण संस्थानों को स्व वित्त पोषित बनाने पर है जोर

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नई दिल्ली, 30 जुलाई (हि.स.)। केन्द्र सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति में मूलभूत बदलाव किए जाने से दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) ने नाराजगी जताई है। डीटीए के प्रभारी प्रो. हंसराज 'सुमन' ने कहा कि नई शिक्षा नीति में अब किसी संस्थान/कॉलेज में तीन हजार से कम छात्रों के होने पर उसकी मान्यता रदद् करने के नियम से बहुत से संस्थान या तो बंद हो जाएंगे या उन्हें मर्ज कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि डीयू में बहुत से ऐसे कॉलेज हैं जहां दो से ढाई हजार के बीच छात्रों की संख्या है। अब इन कॉलेजों को बंद किया जाएगा या फिर दो कॉलेजों को आपस में जोड़कर एक कॉलेज बना दिया जाएगा। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में इन संस्थानों को सरकार स्वायत्त घोषित कर 'स्व वित्त पोषित 'बनाने की कोशिश कर रही है। स्व वित्त पोषित संस्थान को चलाने के लिए छात्रों की फीस के माध्यम से वसूली होगी जिससे आम आदमी के बच्चे इनमें प्रवेश से वंचित रह जाएंगे। प्रो. सुमन ने कहा कि नई शिक्षा नीति में ऐसे संस्थानों को बंद करने का नियम बनाया गया है जो सेल्फ एम्प्लायमेंट के लिए और मैनेजमेंट एजुकेशन के लिए खोले गए थे। उन्हें सरकार अब बंद कर आपस में मिलाकर एक बृहत संस्था में बदलने की योजना बनाएगी। उन्होंने कहा कि बोर्ड ऑफ गवर्नेंस का मामला नई शिक्षा नीति से जोड़ा गया है। इसके अंतर्गत शिक्षकों की तनख्वाह और उनकी पदोन्नति का लेखा जोखा दिखाया जाएगा। अब किसी शिक्षक की तनख्वाह को तय करने का अधिकार बोर्ड़ ऑफ गवर्नेंस को होगा। वही शिक्षकों की पदोन्नति भी तय करेगा, क्योंकि संस्थान ऑटोनॉमस होगा इसलिए उसमें किसी अन्य संस्थान या सरकार का हस्तक्षेप संभव नहीं होगा। ऐसी स्थिति में शैक्षणिक संस्थानों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा। हिन्दुस्थान समाचार / राजेश-hindusthansamachar.in