एमसीडी के पास फंड ही नहीं है, पहले कूड़ा उठा ले यही बहुत है : कमलेश शुक्ला
एमसीडी के पास फंड ही नहीं है, पहले कूड़ा उठा ले यही बहुत है : कमलेश शुक्ला
दिल्ली

एमसीडी के पास फंड ही नहीं है, पहले कूड़ा उठा ले यही बहुत है : कमलेश शुक्ला

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नई दिल्ली, 07 सितंबर (हि.स.)। स्वच्छ भारत अभियान को आगे बढ़ाते हुए दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) ने एक विशेष अभियान के अंतर्गत कूड़ा बीनने वालों को कूड़े के बदले राशन एवं अन्य गृह उपयोगी वस्तुएं देने का निर्णय किया है। एसडीएमसी के इस फैसले के बारे में जैतपुर वार्ड के भाजपा पार्षद एवं नगर निगम हाई पावर कमेटी (टैक्स) के चेयरमैन कमलेश कुमार शुक्ला ने हिन्दुस्थान समाचार के साथ बातचीत में कहा, "मुझे अभी ऐसी किसी योजना की जानकारी नहीं है। एमसीडी के पास पैसा ही नहीं है, कहां से देगी? सिविक सेन्टर जाकर पता करूंगा। नगर निगम के पास तो फंड ही नहीं है, पहले कूड़ा उठा ले यही बहुत है।" दरअसल, एसडीएमसी आयुक्त ज्ञान भारती ने दिल्ली के टैगोर गार्डन में शनिवार को 'सेव आवर अर्थ' नामक एक सेंटर का उद्घाटन किया था। उन्होंने कहा था कि कूड़ा बीनने वालों को पांच किलो प्लास्टिक के बदले दो किलो चावल, सरसों का तेल या एक कूड़े का डस्टविन दिया जाएगा। गीले कूड़े के बदले में कम्पोस्ट (खाद) और डिटर्जेंट जैसी उपयोगी वस्तु मिल सकेंगी। इस कार्यक्रम में नगर निगम स्वच्छ भारत अभियान के नोडल आफिसर राजीव जैन ने कहा था कि हर किसी कूड़ा बीनने वाले को अपने कूड़े को पूरी कीमत पर बेचने का अवसर नहीं मिल पाता है। इस अभियान से उन्हें अपने कूड़े को अपने आसपास ही सही मूल्य पर देने का अवसर मिलेगा। आम लोग भी अपने घर के कूड़े को गीले और सूखे कूड़े में छांटकर घर के गीले कूड़े के बदले कम्पोस्ट (खाद) ले सकते है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जारी स्वच्छता सर्वेक्षण रिपोर्ट में एसडीएमसी 31वें पायदान पर था, जबकि एनडीएमसी और ईडीएमसी को क्रमशः 34वां और 46वां स्थान मिला था। हिन्दुस्थान समाचार/ रतन सिंह-hindusthansamachar.in