पश्चिमी चम्पारण का किसान परम्परागत खेती करके कर रहा प्रत्येक दिन हजारों की कमाई

पश्चिमी चम्पारण का किसान परम्परागत खेती करके कर रहा प्रत्येक दिन हजारों की कमाई
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-प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत बनाने के सपना से किसान को मिली प्रेरणा बगहा,14 अप्रैल(हि.स.)।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह घोषणा कि भारत को आत्मनिर्भर भारत बनाना है,इसका असर भारत के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों में दिखना शुरू हो गया है। जिसका उदाहरण बिहार के पश्चिम चम्पारण जिला अंतर्गत नरकटियागंज स्थित नोनिया टोली गांव का एक किसान अरुण कुमार है।अरुण कुमार की खेती की चर्चा जिला में इन दिनों खूब हो रही है। पिता सेवानिवृत्त प्रधान शिक्षक हैं। किसान अरूण कुमार बताते हैं कि मैं प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत बनाने की प्रेरणा से प्रेरित हैं। प्रधानमंत्री का कर्मठता भरा जीवन मुझे बेहद पसंद है। आज भी वह पहले के प्रधानमंत्रियों की अपेक्षा ज्यादा काम कर भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दिनरात लगे हुए हैं। जिसकी सराहना भारत ही नहीं विश्व में हो रही है।भारत को आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए बढ़ती लागत और घटते मुनाफे को देखते हुए, मैं अपने खेत में गन्ना संग सब्जियों की सह फसली खेती कर रहा हूं, जिससे कि तंगहाली दूर किया जा सके। किसान अरुण ने बताया कि गन्ना के खेत में एक साथ खीरा- भिंडी की खेती करके प्रतिदिन हजारों की कमाई कर होती है। गन्ना के साथ सहफसली खेती किसानों के लिए फायदेमंद है। इससे जहां फसल की लागत कम आती है, वहीं मुनाफा में भी इजाफा हो रहा है।किसानों को परम्परागत खेती में प्रगतिशीलता लाने की बस जरूरत है। प्रगतिशील किसान अरुण ने बताया कि उन्होंने फरवरी 2021 माह में गन्ने की बुआई की थी, इसमें दो कूड़ों के बीच की दूरी साढे़ तीन फीट रखी गई है। बीच की खाली जमीन पर खीरा व भिंडी बोया है, जिसमें एक एकड़ खेती से प्रतिदिन 800 खीरे व 20 किलोग्राम भिंडी का प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है, जो लगभग प्रतिदिन अतरिक्त 10 हजार की कमाई हो जाती है और इसके साथ ही गन्ने की फसल भी खड़ी है।बहरहाल अरूण कुमार कृषि के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हुए हैं, जो इस क्षेत्र में किसानों के लिए मिशाल बनती जा रही है। हिन्दुस्थान समाचार/अरविंद तिवारी