सामाजिक समरसता का मिशाल था सरदार भगत सिंह का जीवन:उपेंद्र त्यागी

सामाजिक समरसता का मिशाल था सरदार भगत सिंह का जीवन:उपेंद्र त्यागी
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नवादा 24 मार्च (हि.स.)। सामाजिक समरसता का सबसे बड़ा उदाहरण समाज को किसी ने दिया तो वो युवा दिलों की धड़कन सरदार भगत सिंह ने अपने फांसी पर लटकने से पहले अपने अंतिम इच्छा के दौरान दिया। उक्त बातें बुधवार को फल गली स्थित संघ कार्यालय में शहीद दिवस सप्ताह के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, दक्षिण बिहार प्रांत के प्रांत सह बौद्धिक शिक्षण प्रमुख उपेन्द्र भाई त्यागी द्वारा स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए कहा गया। उपेन्द्र भाई त्यागी ने कहा कि सरदार भगत सिंह से फांसी के समय अंतिम इच्छा पूछे जाने पर उन्होने जेल में साफ-सफाई करने वाली बाई के हाथों रोटी खाने की बात कही। जिस पर बाई को खाना बनाकर सरदार को खिलाने का आदेश दिया गया। उन्होने आगे कहा कि वो बाई जो जेल के गंदगी, कुड़े-कचरे को साफ तो करती थी लेकिन उस महिला को सभी अछूत मानकर उसके पास तक जाने से कतराते थे ।लेकिन भगत सिंह ने इस इच्छा से समाज को, खासकर समाज के युवा वर्ग को सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए ये बताने का प्रयास किया कि आज समाज के सबसे पिछड़े वर्ग जिसे लोग अछूत समझकर उसको समाज से अलग कर दिए है।हिन्दुस्थान समाचार/डॉ सुमन

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