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बिहार

पक्षियों और पशुओं को पानी पिलाने के लिए सुबह ही निकल पड़ती है टीम साईं की रसोई

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बेगूसराय, 05 अप्रैल (हि.स.)। गर्मियों में तापमान बढ़ने के साथ ही चिड़ियों व पशुओं को पानी की समस्या बढ़ जाती है। पेड़ों की लगातार होती कमी और सूखते जल स्रोतों की वजह से पक्षियों को आश्रय और दाना-पानी की तलाश में भटकना पड़ता हैं। गर्मी में हर वर्ष लाखों चिड़िया पानी की कमी से मर जाती है। ऐसे में बेगूसराय के जागरूक युवाओं की टोली ने पक्षियों के दाना-पानी तथा लावारिस पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था का जिम्मा उठा लिया है तथा एक सौ से अधिक जगहों पर व्यवस्था कर दी गई है। अन्य जगहों पर भी व्यवस्था करने के साथ-साथ लोगों को इसके लिए जागरूक किया जा रहा है। यह कमाल किया है मात्र पांच रुपये में जरूरतमंदों को अस्पताल के नजदीक भोजन उपलब्ध कराने वाली साईं की रसोई टीम ने। पक्षियों के लिए दाना-पानी और पशुओं के लिए नादी-पानी की व्यवस्था और संरक्षण के लिए साईं की रसोई टीम के युवा सुबह ही अपने अभियान पर निकल पड़ते हैं। टीम के अमित जायसवाल ने सोमवार को बताया कि गर्मी के मौसम में पक्षियोंं की चहचहाहट बनी रहे, इसके लिए जरूरी है कि लोग पक्षियों से प्रेम करें और उनका ध्यान रखें। बेगूसराय में इस साल गर्मी का थर्ड डिग्री टार्चर शुरू हो गया है। इस भीषण गर्मी में जीव-जंतु का भी हाल बेहाल है। पशु, पक्षियों पूरी तरह प्रकृति में संरक्षित जल पर ही निर्भर रहते है। अगर इन स्रोतों में पानी के सूखने पर इन्हें यहां वहां भटकना पड़ता है। पानी नहीं मिलने की स्थिति में पक्षी उड़ते-उड़ते बेहोश होकर गिर भी जाते हैं। इन्हीं हालातों के मद्देनजर साईं की रसोई सब दिन लोगों को जागरूक करती है तथा अभी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान में जुटे पंकज, अभिषेक एवं अंकित ने बताया कि गर्मी के दिनों में सूरज की तपन से मनुष्य ही नहीं, पशु पक्षियों को भी राहत की जरूरत है। कभी घर आंगन के कोने में जगह-जगह चिड़ियों के घोंसले आबाद होते थे, लेकिन आज घरों में चिड़ियों का दिखना दूभर हो गया है। शहर में साईं की रसोई टीम ने सूरज की तपन बढ़ते ही पक्षियों के लिए दाना-पानी तथा गाय, बकरी एवं कुत्तों के लिए नादी और पानी उपलब्ध कराने की सार्थक पहल कर रही है। इस अभियान को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। गौरव मित्तल, वैभव एवं शैलेंद्र ने बताया कि गर्मी में पक्षी दाना-पानी की तलाश में कई किलोमीटर तक उड़ान भरते हैं। उन्हें आस-पास ही दाना-पानी मिल जाएगा तो इन पंक्षियों की जान बचाई जा सकती है। यह अभियान जुलाई तक चलेगा, जिसमें स्कूल, कालेज, पार्क, सरकारी कार्यालय, प्राइमरी विद्यालय, पेड़ों पर मिट्टी के बर्तन लगाए जाएंगे, तथा चिड़ियों के लिए दाना-पानी रखा जाएगा। इस अभियान के माध्यम से स्कूलों एव सार्वजनिक स्थानों पर पक्षी के दाना-पानी के लिए अन्य लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र