सही समय पर ईलाज एवं आत्मविश्वास से सुशील को मिला नया जीवन

सही समय पर ईलाज एवं आत्मविश्वास से  सुशील को मिला नया जीवन
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किशनगंज17 मई (हि.स.)। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर कई लोगों के लिए काफ़ी ख़तरनाक साबित हो रही है लेकिन इन विकट परिस्थितियों में भी कुछ लोग ऐसे हैं, जो कोरोना संक्रमण को हराकर जिंदगी की जंग जीत रहे हैं। इन्हीं में से एक हैं किशनगंज जिले के बहादुरगंज के रहने वाले 55 साल के सुशील सिंह, जिन्होंने सोमवार को 30 दिन तक कोरोना के साथ लड़ाई लड़कर अब जिंदगी की जंग जीत ली है। 2 मई को सदर असपताल स्थित वेंटीलेटर पर हुए थे भर्ती सुशील सिंह विगत 2 मई से सदर अस्पताल स्थित ट्रामा सेंटर में वेंटीलेटर पर गंभीर अवस्था में भर्ती हुए थे। उसके बाद चिकित्सक लगातार उनकी देखरेख करते रहे। साथ ही उनका हौसला भी बढ़ाते रहे। चिकित्सकों की बेहतर देख-भाल काफ़ी असरदार साबित हुई। 16 मई को उनकी कोरोना जांच रिपोर्ट नेगेटीव आयी। जिसके बाद 17 मई को सदर अस्पताल के अस्पताल उपाधीक्षक ,डॉ अनवर आलम एवं सिविल सर्जन डॉ. श्री नंदन ने उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया। 18 अप्रैल को हुए थे संक्रमित सुशील सिंह ने बताया उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही थी। जांच करवाया तो 18 अप्रैल को वह संक्रमित पाए गये। ऑक्सीजन लेवल गिरने से बेहतर इलाज के लिए उन्हें मधेपुरा रेफर किया गया, जहाँ उनकी हालत और ख़राब हो गयी। जिसके बाद परिजन ने उन्हें सिलीगुड़ी के अस्पताल में भर्ती करवाया। वहाँ भी हालत में सुधार नही आने के बाद उन्हें पुनः किशनगंज सदर अस्पताल स्थित ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया गया।यहां तबीयत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। उन्हें इस तरह 12 दिन जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़नी पड़ी। इसके बाद उनकी सेहत में सुधार होने लगा और 15 दिन बाद सुशील सिंह ने कोरोना को हरा दिया। पॉजिटिव माइंड सेट से जीती जा सकती है कोरोना से जंग सुशील सिंह ने कहा कि किशनगंज सदर अस्पताल स्थित ट्रामा सेंटर के डॉक्टर्स की टीम उनके लिए भगवान बन कर आये। डॉक्टरों के सहयोग के ही कारण वह मौत के मुंह से बाहर निकल पाए। उन्होंने बताया कोरोना संक्रमण के इस दौर में पैसे देने के बावजूद प्राइवेट अस्पताल समुचित ईलाज नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा निजी अस्पताल की तुलना में उन्हें सरकारी अस्पताल में निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण ईलाज मिला। सुशील सिंह ने कहा कि एक मरीज के लिए उपचार के साथ पॉजिटिविटी और मोटिवेशन काफी जरूरी होता है। इसी मोटिवेशन से उन्होंने कोरोना के खिलाफ लड़ाई जीती है। कोरोना को हराने के लिए टीम वर्क जरूरी सिविल सर्जन डॉ नंदन ने बताया कि कोरोना संक्रमण से पॉजिटिविटी के साथ जंग आसानी से जीती जा सकती है। उस पर भी अगर कोरोना का संक्रमण हो जाए तो नकारात्मक विचार आना स्वाभाविक है। ऐसी परिस्थिति में सुशील सिंह कोरोना संक्रमितों के लिए प्रेरणा के स्रोत हो सकते हैं। सुशील सिंह बुजुर्ग होने के बावजूद जिंदादिल और हिम्मत वाले थे । उन्होंने कोरोना का डटकर मुकाबला किया। जिसकी वजह से वह आईसीयू और वेंटिलेटर पर जाने के बाद भी फिर से तंदुरुस्त हो सके लेकिन मरीजों की इस जंग को जीतने में सदर अस्पताल स्थित ट्रामा सेंटर के डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिन्होंने टीमवर्क से न सिर्फ सुशील सिंह बल्कि उन जैसे सैकड़ों मरीजों को फिर से स्वस्थ होने में अपनी पूरी मेहनत की है। जिसमें सदर अस्पताल स्थित ट्रामा सेंटर के चिकित्सकों की भूमिका न सिर्फ महत्त्वपूर्ण रही, बल्कि सराहनीय भी रही है। हिन्दुस्थान समाचार/सुबोध/चंदा