पति के घर की देहरी पर रात भर बैठी रही रागिनी , आज है शादी की 9वी वर्षगांठ

पति के घर की देहरी पर रात भर बैठी रही रागिनी , आज है शादी की 9वी वर्षगांठ
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नवादा 26 अप्रैल (हि स)। नवादा नगर का एक पढ़ा लिखा युवा दंपती के बीच पिछले 6 सालों से जुदाई की नौबत बनी है। पत्नी रागनी देर रात्रि से सोमवार की दोपहर तक पति के घर की देहरी पर घरवापसी का इंतजार कर रही है। रागनी चाहती है कि उसे पति का प्यार व साथ मिलता रहे तो पति है कि तलाक देने पर अड़ा है। दंपती के बीच मधुर संबंध कायम करने का प्रयास किसी स्तर से नहीं हो रहा है। पिछले छह वर्षों से जारी तकरार कोर्ट-कचहरी तक पहुंचा हुआ है। कुछ नाते रिश्तेदार दोनों के बीच की खाई को पाटने की बजाया चौड़ा करने में लगे में हैं। ऐसे में विवाद सुलझने की बजाय उलझता जा रहा है। मामला जिला मुख्यालय के हरिश्चंद्र स्टेडियम रोड निवासी अधिवक्ता स्व. ईश्वरी प्रसाद के पुत्र विकास कुमार व बहू रागिनी मिश्रीलाल साहू का है। दोनों की शादी 26 अप्रैल 2012 को मधुबनी में हुई थी। शादी के पहले रागिनी दिल्ली में जॉब करती थी। रैनवैक्सी फार्मास्यूटिकल प्राइवेट कंपनी में इंप्लाई थी। पति कंप्यूटर इंजीनियर हैं। शादी के कुछ महीनों बाद ससुराल वालों ने रागिनी को नौकरी छोड़कर पति के साथ रहने को कहा। रागनी परिवार वालों की बात मान नौकरी छोड़ पति के साथ बंगलुरु में रहनी लगी। तीन साल बीतते-बीतते बहुत कुछ बदलने लगा। रागिनी कहती हैं कि 2015 के मार्च महीना में विकास कुमार अपने मम्मी-पापा से मिलने की बात कह बंगलुरु आवास से निकला। इसके बाद विकास ने न तो फोन किया और ना ही मैसेज का जवाब दिया। रागिनी के ससुर उस वक्त जिंदा थे। उसने ससुर को फोन किया तो उन्होंने विकास के बारे में जानकारी से इंकार किया था। तब पति के दोस्तों से पता चला था कि वह बंगलुरु के ही एक पीजी बॉयज हॉस्टल में रह रहा है।उसके बाद मिलने का कई बार प्रयास की । परंतु सफलता नहीं मिली। साल 2018 के जनवरी महीने में नवादा कोर्ट से पति के द्वारा भेजे गए डाइवोर्स का नोटिस मिलने के बाद उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। तब से रागिनी का बंगलुरु से नवादा और नवादा से बंगलुरु का आना जाना सिर्फ केस मुकदमे के लिए हो रहा है। नवादा कोर्ट ने रागिनी को भरण पोषण के लिए प्रति माह 10 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। रागिनी को उक्त रकम भी नहीं मिल रही है। रागिनी की शिकायत है कि मामा ससुर अरुण कुमार और हमारे जेठ राजन नहीं चाहते हैं कि हम पति-पत्नी साथ हों। शायद ससुर होते तो बात इतनी दूर तक नहीं जाती। फरवरी 2020 में उनका असमय निधन हो गया। हालांकि कोर्ट द्वारा दंपती के बीच सुलह का एक और मौका दिया गया है। 5 अप्रैल 2021 को कोर्ट ने पति पत्नी के बीच आपस में बात कर आपसी सहमति बनाने का आदेश दिया है। परंतु पति अब भी अड़ा है। रागिनी के अनुसार वह वन टाइम सेटलमेंट चाहते हैं। अब रागिनी गांव-टोला और समाज के लोगों से गुहार लगा रही है। वह पति का साथ हर हाल में चाहती हैं। हालांकि, रागिनी कहती है कि दोनों के बीच कुछ फासला नहीं है, एक फोन कॉल ही सारी दुरियां मिटा देगा। इंतजार है उस शुभ घड़ी की। हिन्दुस्थान समाचार/डॉ सुमन/चंदा