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बिहार

रोजी रोटी कमाने के लिए प्रदेश जाने लगे हैं लोग

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निर्मली, 20 जून (हि. स.)। अनलॉक होते ही नेपाली लोगों की झुंड एक बार फिर से रोजी रोटी की तलाश में इंडो नेपाल बॉर्डर पार कर प्रदेश जाने लगे हैं। कोरोना संकट काल में सबसे अधिक मार गरीब वर्ग के लोगों को झेलना पड़ा हैं। पेट की भूख की वजह से एक बार फिर से लोग पंजाब, दिल्ली, हरियाणा व अन्य परदेश काफी संख्या में जा रहे हैं। कुनौली भंसार के इंडो नेपाल सीमा पर करने के दौरान बतया की नेपाल में काम नहीं मिलने से उन्हें परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। नेपाल में लॉक डाउन भी अब तक टूटा नहीं हैं।सरकार के द्वारा अभी तक गरीब तबके के लोगों को किसी प्रकार का राहत नहीं दिया हैं। गरीबी के वजह से रोजगार की तलाश में पजांब ,हरियाणा जा रहे हैं। यही स्थिति सीमावर्ती क्षेत्र के कई पंचायतों का हैं। सैकड़ो की संख्या में लोग दूसरे प्रदेश बस रिजर्ब करके जा रहे हैं। •राहत नहीं रोजगार चाहिए: कोरोना से बेरोजगार हुए लोगों आक्रोशित होकर कहते हैं कि सरकार ने लोगों व गरीबों के लिए दो महीने की फ्री राशन दी गई हैं। लेकिन कई ऐसे युवा हैं जो कहते हैं उन्हें राहत नहीं रोजगार चाहिए। खैरात से कभी किसी का भला नहीं हुआ है। आपदा के समय भले ही हमें ये थोड़ी राहत दे जाये । पर, इसे आदत नहीं बनानी चाहिए। सीमावर्ती क्षेत्र के रजत कुमार, कमलाकांत और पार्वती देवी व अन्य ने बताया कि हरियाणा के फरीदाबाद रहकर वे में लंबे समय से काम काज कर रही हैं। पहली लहर के बाद वे घर लौट आयी थीं।वहां परिवार के सभी सदस्य कहीं न कहीं काम करते थे। इससे परिवार में आसानी से हर माह 35 हजार से 40 हजार रुपये कमा लेते थे। सारा खर्च काटकर आराम से प्रति माह 20 हजार रुपये की आसानी से बचत हो जाती थी। घर आने पर जमा पैसे भी खत्म हो गए। कुनौली के दुःखन दास ने दुखड़ा सुनाते हुए कहा कि अनलॉक लॉकडाउन हमें समझ में नहीं आता है। हमें तो बस काम चाहिए ताकि, परिवार का पेट चला सके। मौजूदा समय में यहां काम भी नहीं मिलता हैं। पंजाब से आने जाने में पांच हजार दो सौ रुपये बस के भाड़ा देने में खर्च हो जाते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/सुनील