राष्ट्र निर्माण में डॉ भीमराव अंबेडकर की भूमिका विषयक वर्चुअल संवाद आयोजित

राष्ट्र निर्माण में डॉ भीमराव अंबेडकर की भूमिका विषयक वर्चुअल संवाद आयोजित
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भागलपुर, 14 अप्रैल (हि.स.)। पीस सेंटर परिधि द्वारा अंबेडकर जयंती के अवसर पर बुधवार को वर्चुअल संवाद "राष्ट्र निर्माण में डॉ भीमराव अंबेडकर की भूमिका" का आयोजन किया गया। 11 से 14 अप्रैल तक पीस सेंटर परिधि द्वारा आयोजित "फुले से अंबेडकर- विचार यात्रा" के अंतिम कड़ी में यह संवाद आयोजित हुआ। इस अवसर पर मुख्य वक्ता भागलपुर के वरिष्ठ सामाजिक समाज कर्मी राम शरण थे। अपने वक्तव्य में उन्होंने कहा कि अंबेडकर सिर्फ अंग्रेजों से आजादी नहीं चाहते थे बल्कि उन तमाम सामाजिक, राजनैतिक धार्मिक गुलामी से भी आजादी चाहते थे जिसके कारण भारत का बहुसंख्य आबादी गुलामों से भी बदतर जिंदगी जीने को विवश है। कुछ लोग अंबेडकर को सिर्फ दलितों के नेता मानते हैं। जबकि राष्ट्र निर्माण की दिशा निर्धारित करने में और बहुसंख्य आबादी जिसमें महिला, दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक आदि के बेहतरी के लिए उन्होंने जीवन पर्यंत प्रयास किया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के राष्ट्र निर्माण में योगदान के रूप में अगर हम देखें तो उन्होंने कुछ प्रमुख क्षेत्रों में जबरदस्त काम किया। शिक्षा के सर्वव्यापीकरण, महिलाओं के अधिकार, श्रमिकों के अधिकार, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और अधिकार, महिला पुरुष समता, जाति धर्म विभेद, छुआछूत मिटाने आदि के लिए हमेशा प्रयासरत रहे। उन्होंने शिक्षा को सबसे अधिक महत्व दिया। वे जानते थे कि शिक्षा होगी तभी संगठन होगा और तभी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष। वह वर्ग चेतना को भी बहुत-बहुत महत्व देते थे। देश में समता और बराबरी हो इसके लिए उन्होंने संविधान में कई प्रावधान किए। तब भी वे कहते थे कि संविधान अगर अच्छे हाथ में हो तो अच्छा काम होगा और अगर बुरे हाथ में चला जाए तो उसका गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है। रामशरण ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण है चेतना का विकास होना। यह हर वर्ग के लिए जरूरी है। एक सचेत मन यह समझ पाएगा की यह अन्याय है और अन्याय करना गलत है। उसी तरह चेतना जागृत व्यक्ति ही अपने ऊपर होने वाले अन्याय को समझ पाएगा और विरोध कर पाएगा। इस अवसर पर अभिजीत शंकर ने कहां की बाबा साहब बराबरी को सबसे अधिक महत्व देते थे वह सभी को शिक्षित होने की बात कहते हैं। पर यह भी कहते हैं कि शिक्षा दो धारी तलवार की तरह है। शिक्षा अगर अन्याय से लड़ने की सीख देता है तो अन्याय करने का तरीका भी बताता है। इसलिए शिक्षा का हमेशा मानवीय करन होना चाहिए। लाडली राज ने अंबेडकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ दलितों के लिए ही काम नहीं किया बल्कि आज जो महिलाओं की बेहतर स्थिति हुई है, उसमें अंबेडकर का सबसे बड़ा योगदान है।संचालन करते हुए सार्थक भरत ने कहा कि बाबा साहब यह मानते थे कि कोई भी धर्म बाड़े नहीं होना चाहिए। यानी बंधन नहीं होना चाहिए। यह मानवता पर आधारित होना चाहिए। इस अवसर पर उदय, ललन, चंदा देवी, रश्मि राज, रविंद्र कुमार सिंह, अंकित कुमार, दुर्गा, मनोज कुमार, अभिजीत शंकर ,लाडली राज, राहुल आदि ने भी अपनी बातें रखी। हिन्दुस्थान समाचार/बिजय