हिन्दी साहित्य जगत में निधि की रचना हो रही गौरवान्वित- अनुराग

हिन्दी साहित्य जगत में निधि की रचना हो रही गौरवान्वित- अनुराग
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मधुबनी,07मई,(हि.स.)। मिथिलांचल परिक्षेत्र की लड़कियां विभिन्न विधाओं में परचम लहरा रही हैं।शुक्रवार को यहां की माटी- पानी से जुड़ाव रखने वाली निधि झा की लेखनी हिन्दी साहित्य में रचनात्मक विधा में राष्ट्रीय स्तर पर चमक उठी हैं। इस पुस्तक की गुगल मीट व जूम पर लोकार्पण के साथ की इसकी थीम पर हिन्दी साहित्य जगत के नामचीन लेखकों की वेवाक प्रशंसनीय टिप्पणीकारों के आशीष मंगलकामना ने निधि को काफी गौरवान्वित किया है।साहित्य जगत की दहलीज पर कम उम्र में ही निधि झा की हिन्दी काव्य संग्रह"काफिर का कानून" लब्धप्रतिष्ठ होकर मिथिलांचल का नाम रौशन किया है। पूर्णिया जिला की अमौर प्रखंड के विष्णुपुर गांव की निधि झा वर्तमान में एक निजी कंपनी में कानूनी सलाहकार पद पर कार्यरत हैं।काव्य संग्रह की लेखिका निधि झा ने कहा कि बाल्यकाल में फणीश्वर नाथ रेणु की पुस्तक परती परिकथा, मैला आंचल आदि रचनाओं को पढकर निरंतर प्रभावित होती रही।छाात्र जीवन में कानून शास्त्र के अध्ययन मेें तल्लीन रही।वाबजूद साहित्य की रचनात्मक कशमशााहत जेहन मेें बनी रहती थी।खासकर यहां की माटी-पानी की सांस्कृतिक धरोहर व ग्रामीण भाषाई मिठांस मुझे शुरू से आकर्षित करता रहा।निधि ने सांस्कृतिक व्यवहारिक संज्ञान फलीभूत होने में अपने पिता सतीश झा को साहित्यिक व कर्म क्षेत्र का आका बताई। काव्य-संग्रह 'काफिर का कानून' का प्रकाशन और विमोचन के बाद हिन्दी साहित्य जगत मेें खुुुुब लोकप्रियता बटोर रही है। लेखिका कानून से स्नातक और निजी कंपनी में कार्यरत हैं।युवा साहित्यकार अनुराग ने कहा कि पुस्तक में मातृभूमि,अप्रवास एवं पलायन का दर्द, राजनीति की विडम्बना,मानवीय जज्बातों एवं प्रेम का सुन्दर प्रस्तुतीकरण एवं चित्रण हुआ है। किन्तु इस किताब का केन्द्रीय तत्व अगर कहा जाऐ तो वो है प्रेम। किताब पाठकों के बीच काफी लोकप्रिय हो रही है और इसे हर जगह से अच्छी प्रतिक्रियाऐं मिल रही हैं।कहा कि लेखिका निधि की पहली किताब ने ही बेहतर सोहरत हाशिल की है। निधि हिन्दी साहित्यिक जगत में वह अपनी मजबूत दस्तक देकर सशक्त उपस्थिति दर्ज कराती दिख रही हैं। हिन्दुस्थान समाचार/लम्बोदर