नल-जल योजना में लाखों का गबन, मुखिया समेत 3 वार्डों के अध्यक्षों व सचिवों पर प्राथमिकी दर्ज
नल-जल योजना में लाखों का गबन, मुखिया समेत 3 वार्डों के अध्यक्षों व सचिवों पर प्राथमिकी दर्ज
बिहार

नल-जल योजना में लाखों का गबन, मुखिया समेत 3 वार्डों के अध्यक्षों व सचिवों पर प्राथमिकी दर्ज

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बिहारशरीफ , 27 जुलाई (हि.स.)। सूबे में नल-जल योजना व गली-नली योजना में गड़बड़ी की शिकायतें आम हो गयी हैं। जहां भी जांच होती है,गड़बड़ियों की भरमार मिलती हैं। सोमवार को रहुई प्रखंड की उतरनावां पंचायत में राशि की अनियमितता की बड़ी शिकायत मिली है। प्रथम जांच में आरोप सही पाये गये हैं। यही कारण है कि मुखिया समेत 3 वार्डों के अध्यक्षों व सचिवों के विरुद्ध एफआईआर का आदेश दिया गया है। इतना ही नहीं, डीएम योगेन्द्र सिंह ने मुखिया को पदच्युत करने की अनुशंसा भी कर दी है। जिला पंचायती राज पदाधिकारी (डीपीआरओ) मो. शोएब आलम ने बताया कि उतरनावां में सरकारी राशि की बड़े पैमाने पर बंदरबांट किये जाने के साक्ष्य मिले हैं। इस पंचायत के वार्ड नंबर 2, 4, 7, 10, 11 और 12 में कराये गये कार्यों की जांच करायी गयी है। जांच में पाया गया है कि मानक प्राक्कलन के अनुरूप कार्य नहीं कराये गये हैं। मुखिया को शोकॉज किया गया है। जवाब संतोषजनक नहीं आने पर उनके विरूद्ध करवाई की अनुशंसा की जाएगी। रहुई में कराया गया नल-जल योजना का काम मुखिया समेत 3 वार्डों के अध्यक्ष सचिवों पर केस किया गया। वार्ड 4 और 7 में नल-जल का काम पीएचईडी ने कराया है। इसके बावजूद, मुखिया ने मनमाने तरीके से राशि का दुरुपयोग किया है। काम में गुणवत्ता का ख्याल नहीं रखा गया है। जांच के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि मुखिया के साथ ही तत्कालीन पंचायत सचिव ने मिलकर काम कराया है। इस तरह, योजना की गड़बड़ी में पंचायत सचिव को भी सहभागी माना जा रहा है। इस संबंध में बीडीओ ने यह कहा है कि राशि को रोककर रखने के कारण सरकारी योजना बाधित हुई। साथ ही, राशि ट्रांसफर करने में कमीशन की मांग की गयी है। वार्ड संख्या 7, 11 और 12 के वार्ड अध्यक्ष और सचिव ने गलत तरीके से रुपये की निकासी और हस्तांतरण किया है। इस मामले में मुखिया ने भी पद का दुरुपयोग किया है। डीपीआरओ ने स्पष्ट कहा है कि इस गड़बड़ी में पंचायत सचिव की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता है। इस मामले में बीडीओ विवेक कुमार और पंचायत सचिव उपेन्द्र कुमार सिंह ने थाने में एफआईआर दर्ज करायी है। इसमें मुखिया अशोक कुमार पर राशि में गड़बड़ी, भ्रष्टाचार के साथ ही सरकारी राशि के गबन की बात कही गयी है। एफआईआर में कहा गया है कि वार्ड नंबर 9 की पिंकी देवी, 4 की नीलम सिन्हा और 8 की बबीता देवी ने आरोप लगाया है कि राशि हस्तांतरण में 20 फीसदी कमीशन की मांग की गयी थी। 21 लाख 78 हजार 648 रुपये अब भी बैंक खाते में पड़े हैं। इसके कारण योजना को धरातल पर उतारने में बाधा उत्पन्न हुई। इसमें में राशि के गबन की आशंका व्यक्त की है। हिन्दुस्थान समाचार/प्रमोद पाण्डेय/हिमांशु शेखर/विभाकर-hindusthansamachar.in