संतमत के महान पुरोधा थे महर्षि मेंही परमहंस -स्वामी शान्तानन्द

संतमत के महान पुरोधा थे महर्षि मेंही परमहंस -स्वामी शान्तानन्द
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नवादा 11 जून (हि स)। सबका ईश्वर एक है। ईश्वर तक जाने का रास्ता भी एक है। उसकी प्राप्ति अपने अंदर होगी। इसके लिए सद्गुरु की निष्कपट सेवा, सत्संग, दृढ़ ध्यानाभ्यास पंच पाप झूठ, चोरी, नशा ,हिंसा, व्यभिचार का त्याग करना होगा। उक्त बातें शुक्रवार को स्वामी शांतानंद जी महाराज ने 20 वीं सदी के महान संत सद्गुरु व संतमत के प्रचारक, पुरोधा महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के 36वाँ परिनिर्वाण दिवस के मौके पर बोल रहे थे। प्रकृति की गोद में अवस्थित पूज्यपाद स्वामी नित्यानंद जी महाराज की साधना स्थली महर्षि संतसेवी ध्यानयोग आश्रम, धनावाँ, नवादा में संत सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज का 36वाँ परिनिर्वाण दिवस आश्रम संचालक स्वामी शांतानंद जी महाराज के सान्निध्य में 11 जून दिन शुक्रवार को मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत ब्रह्ममुहुर्त 3बजे ध्यानाभ्यास से प्रारंभ हुआ। दिन में एक एक घंटे पांच बार ध्यानाभ्यास तथा तीन बार सत्संग प्रवचन का आयोजन किया गया। प्रातः कालीन सत्संग स्वामी शांतानंद जी महाराज के द्वारा संत स्तुति गुरु विनती, ग्रंथ पाठ, वेद वाणी, गुरु वाणी का पाठ किया गया। सुबह 8.30 बजे सबसे पहले स्वामी शांतानंद जी महाराज ने पुष्पांजलि सद्गुरु महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के तस्वीर पर श्रद्धा सुमन समर्पित किया उसके बाद आश्रमवासियों ने किया। अपराह्न कालीन सत्संग प्रवचन के मौके पर महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज के चरित्र जीवन और व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए स्वामी शांतानंद जी महाराज ने कहा कि महर्षि मेँहीँ परमहंस जी महाराज संतमत सत्संग के पुरोधा व सच्चे संत थे। उनका संपूर्ण जीवन संतमत के प्रचार व प्रसार कर मानवता को जन जन तक पहुंचाने का काम किया। उनका जन्म बिहार के पूर्णिया के सिकड़ीगढ़ धरहरा निवासी श्री बाबुजन लाल दास व माता जनकवती के पुत्र के रुप में अपने नाना के घर खोखसी श्याम में वैशाख शुक्ल चतुर्दशी तद्नुसार 28अप्रेल 1885ई.को हुआ था। आपके बचपन का नाम रामानुग्रह लाल दास था। इनके कुशाग्र ज्ञान गरिमा को देखकर सद्गुरु परम संत बाबा देवी साहब ने नाम मेँहीँ दास रखा। आप अपने गुरु बाबा देवी साहब से संतमत की सर्वोत्तम साधना नादानुसंधान की दीक्षा लेकर भागलपुर के कुप्पाघाट के प्राचीन गुफा में 1933-34 ई. 18महिना तक कठोर साधना कर आत्म साक्षात्कार कर ईश्वर को प्राप्त किया। इस अवसर स्वामी महेंदर बाबा, मुनिल बाबा, गणेश बाबा, पूर्व मेजर आर पी पंडित, नकुल, प्रमोद कुमार प्रवीण, मुकेश वर्णवाल, डा सुनिल, सुनील कुमार शर्मा, राजीव ,समाजसेवी रणजीत गुप्ता, सतीश कुमार आदि मौजूद थे। हिन्दुस्थान समाचार/डॉ सुमन/चंदा