गलत निर्णयों से बैकफुट पर आया वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय
गलत निर्णयों से बैकफुट पर आया वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय
बिहार

गलत निर्णयों से बैकफुट पर आया वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय

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आरा, 27 जुलाई(हि.स.)। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा अपने असंवैधानिक कार्यो को लेकर लगातार अपनी साख गिराने में जुटा हुआ है। विश्वविद्यालय के बड़े पदों पर बैठे अधिकारी लगातार अपनी अयोग्यता को प्रदर्शित कर रहे हैं,गलत निर्णय करवा रहे हैं और विश्वविद्यालय की साख गिरा रहे हैं। एक बार फिर नियमों के खिलाफ निर्णय लेने और फिर छात्र संगठनों के व्यापक स्तर पर सोशल मीडिया पर विरोध के ठीक एक दिन बाद अब विश्वविद्यालय बैकफुट पर आ गया है। दो दिन पहले सिंडिकेट की बैठक में विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेजो में छात्राओं से नामांकन शुल्क के समय सुविधा शुल्क के नाम पर 998 रुपये प्रति छात्रा लिये जाने का निर्णय करा लिया गया। सिंडिकेट की बैठक में लिया गया यह निर्णय बिल्कुल राज्य सरकार के आदेश के खिलाफ है। राज्य सरकार ने छात्राओं से नामांकन शुल्क के समय किसी भी तरह के शुल्क नहीं लेने का आदेश जारी किया है। यह आदेश एस सी एसटी छात्रों के लिए भी दिया गया है। अब विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अध्यक्ष प्रो केके सिंह इस मामले में पूरी तरह घिरते जा रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार के फैसलों को नजरअंदाज कर छात्राओं से नामांकन शुल्क लेने का फैसला सिंडिकेट की बैठक में पास करा लिया। अब छात्र संगठनों के आंदोलन की चेतावनी के बाद कुलपति प्रो. देवी प्रसाद तिवारी ने छात्राओं से शुल्क लेने के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है और कहा है कि इस संबंध में राज्य सरकार और राजभवन से दिशा—निर्देश मांगा जाएगा और जैसा आदेश मिलेगा उसके अनुसार फिर निर्णय लिया जाएगा। कुलपति का कहना है कि राज्य सरकार द्वारा नामांकन के लिए छात्राओं से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिये जाने के आदेश के बाद जीरो रुपये शुल्क पर छात्राओं के नामांकन हो रहे हैं। इससे महिला कॉलेजोंं की स्थिति चरमरा गई है और कॉलेज की आंतरिक वितीय स्थिति जर्जर हो गई है। स्थिति है कि महिला कॉलेज आंतरिक स्रोत से अब कॉलेज के संविदा कर्मियों को वेतन तक नहीं दे रहा है। छह महीने से वेतन नहीं मिलने से महिला कॉलेज के कर्मी हड़ताल पर भी चले गए थे। महिला कॉलेज की जर्जर हो गई वित्तीय स्थिति को देखते हुए छात्राओं से नामांकन शुल्क लेने का फैसला किया गया था किंतु अब छात्र संगठनों के विरोध के बाद इस फैसले को अब स्थगित कर दिया गया है। बता दें कि इस निर्णय के बाद विश्वविद्यालय एकबार फिर बैकफुट पर आ गया है और हाल ही में लिये गए उसके स्वयं के फैसले को फिलहाल स्थगित करना पड़ा है। अधिकारियों की गैर जिम्मेदार हरकतों के कारण विश्वविद्यालय छात्रों के आक्रोश का शिकार बार बार हो रहा है। कुलपति भी ऐसे अधिकारियों को हटाने की बजाय उन्हें प्रश्रय देने में ही दिलचस्पी ले रहे हैं। विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अध्यक्ष प्रो.सिंह को हाल ही में कुलपति ने कार्यकाल पूरा होने के बाद एक बार फिर दो साल के लिए कार्यकाल विस्तार दे दिया है। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/हिमांशु शेखर/विभाकर-hindusthansamachar.in