गोपालगंज,सीवान और  सारण के सैकड़ों गांवों में फैला  पानी
गोपालगंज,सीवान और सारण के सैकड़ों गांवों में फैला पानी
बिहार

गोपालगंज,सीवान और सारण के सैकड़ों गांवों में फैला पानी

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दो दशक बाद जिले के 5 प्रखंडों के लोगों ने झेली बाढ़ की ऐसी त्रासदी एनएच 28 बना रैन बसेरा गोपालगंज,31 जुलाई(हि. स.)। नेपाल में जब -जब अधिक बारिश हुई है उसका खमियाजा उतर बिहार के लोगों को भुगतना पड़ा है। इस वर्ष भी नेपाल में लगातार बारिश होने के कारण वाल्मीकी नगर बराज से लगभग 5 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद सारण और रिंग बांध के 72 किलोमीटर में फैले बांध पानी दबाव के कारण ताबड़तोड़ 5 जगहों पर टूट गए। जिससे 5 लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। लोग ऊंचे स्थान पर शरण लिए हुए है। घरों में पानी लगने के कारण अधिकांश परिवार के लोग छत पर रात काट रहे है। जिले के मांझा प्रखंड के पुरौना व बरौली प्रखंड के देवापुर के समीप रिंग बांध टूटने के बाद सारण तटबंध भी गंडक के इस पानी को बहुत देर तक नहीं रोक सका। सारण बांध टूटने के बाद मांझा व बरौली प्रखंड के दर्जनों गांव पूरी तरह से जलमग्न हो गए। गंडक नदी का रौद्र रूप देखकर हर कोई अपना सामान, मवेशी व बच्चों को लेकर ऊंचे स्थान पर शरण लेने के लिए भागने लगा। बाढ़ का पानी में घर व बथान घिर जाने के बाद अपने - अपने बच्चों को लेकर भाग रहे लोगों ने कहा कि पिछले दो दशक में गंडक नदी का ऐसा रूप नहीं दिखा। पानी के तेज बहाव के आगे हर कोई अपने आप को लाचार सा महसूस कर रहा है। वर्ष 1999, 2002 में ऐसी तबाही मचाई थी। ऐसे में करीब दो दशक के बाद गंडक नदी का यह रूप देखने को मिल रहा है। बाढ़ में फंंसे रामनरेश बीन ने कहा कि गंडक नदी के तेज बहाव के आगे हर कोई अपना सामान लेकर ऊंचे स्थान पर भागने लगा था। लोगों को बाहर निकलने के लिए जिला प्रशासन ने नाव तक की व्यवस्था नहीं कराई थी। बरौली प्रखंड के देवापुर पश्चिम टोला गांव के लोगों ने बताया कि गंडक नदी का रौद्र रूप देखकर महिलाएं भी सहम गईंं । गंडक नदी के तेज बहाव को देखते हुए गांव के लोग अपने -अपने सामान घर की छत पर रखने लगे। उन लोगों ने बताया कि वर्ष 2002 में ऐसी तबाही देखने को मिली थी। उसके बाद इस मानसून में ऐसी तबाही देखने को मिल रही है। गंडक नदी का जलस्तर पिछले कई दिन से से बढ़ रहा था लेकिन जिला प्रशासन के अधिकारी बांध को सुरक्षित बताने में जुटे रहे। बरौली प्रखंड के देवापुर पूर्वी टोला गांव के रामायण प्रसाद, मनोहर प्रसाद व राजेश्वर सिंह ने कहा कि जिला प्रशासन के सभी दावे खोखले हैं। जिला प्रशासन ने पहले बांध बचाने का विश्वास दिलाया था। फिर बांध टूटा तो सबको सुरक्षित निकालने का भरोसा दिया गया। लेकिन जब बाढ़ आयी तो प्रशासन का दावा फेल रहा। एनडीआरफ की टीम बाढ़ में फंसे लोगों को बाहर निकालने में लगी रही । बांध टूटने के बाद अधिकतर गांवों के लोग जैसे- तैसे अपना सामान व अपने परिवार के सदस्यों को लेकर बाहर डेरा डाले हुए हैंं। एनएच 28 पर लोगों ने अपना तंबू लगा लिया है। मवेशियों को भी एनएच 28 पर बांध कर उसे खिला रहे हैंं। कुछ लोग वाहन पर मवेशी को लादकर अपने रिश्तेदारों के यहां भेज रहे हैंं ताकि मवेशी सुरक्षित रह सकें। डीएम अरशद अजीज ने बताया कि जिले में सबसे अधिक 5 प्रखंडों की 58 पंचायतों की 2,28,712 आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। बाढ़ प्रभावित इन क्षेत्रों में बचाव और राहत कार्य चलाए जाने के लिए एनडीआरएफ टीमें तैनात की गयी हैं। 184 सामुदायिक किचेन चलाये जा रहे हैंं। उन्होंने बताया कि बैकुंठपुर प्रखंड की 16 पंचायतों में 6 पंचायत आंशिक,सिधवलिया प्रखंड में 8 पंचायत आंशिक,गोपालगंज प्रखंड की एक पंचायत पूर्ण और 5 आंशिक, बरौली प्रखंड की 4 पंचायत पूर्ण तो 7 पंचायत आंशिक, मांझा प्रखंड की 2 पंचायत पूर्ण और 5 पंचायत आंशिक प्रभावित हैंं। उन्होंने बताया कि प्रभावित लोगों को रहने के लिए राहत शिविर बनाए गए हैंं। हिन्दुस्थान समाचार/अखिला /विभाकर-hindusthansamachar.in