भोजपुर के फरना में आरोपी को छुड़ाने के मामले में एफआईआर,परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए

भोजपुर के फरना में आरोपी को छुड़ाने के मामले में एफआईआर,परिजनों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए
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आरा,20 जून(हि.स.)। भोजपुर जिले के बड़हरा थाना क्षेत्र के फरना गांव में शुक्रवार को कोइलवर इलाके में हुए फायरिंग के मामले में नामजद बनाये गए तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने गई पुलिस ने अब पुलिस पर हमला करने और पुलिस की गाड़ी को क्षतिग्रस्त करने,आरोपियों को छुड़ाने,सरकारी कार्य मे बाधा डालने और अनुसूचित जाति अत्याचार अधिनियम के मामले में पुलिस ने नौ नामजद और पांच छः अज्ञात पर एफआईआर दर्ज करा दी है। बड़हरा थाना की पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है। पुलिस की इस कार्रवाई ने एकबार फिर बड़हरा थाना की पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़ा किया है।फरना गांव के ग्रामीणों के बीच जो चर्चाएं चल रही है उससे स्थानीय थाना की पुलिस द्वारा उन्हें प्रदत शक्तियों का दुरुपयोग बताया जा रहा है। ग्रामीण सूत्रों के अनुसार फरना गांव के शंकर सिंह उर्फ फौजी की हत्या गंगा के दियारे इलाके में अपराधियों ने कर दी थी।इस मामले में परिजनों की तरफ से नामजद एफआईआर दर्ज कराई गई थी किन्तु बड़हरा की पुलिस ने किसी को आज तक गिरफ्तार नही किया है। पुलिस शुक्रवार को कोइलवर क्षेत्र की एक घटना में आरोपी बनाए गए नीरज सिंह,अभिमन्यु सिंह और कृष्णा सिंह को गिरफ्तार करने फरना पहुंची थी। ग्रामीण सूत्र बताते हैं कि पुलिस की छापेमारी में फरना पहुंचने के दौरान उनका अपना कोई पहचान नही था।पुलिस न ही वर्दी में थी और न ही उनके पास रायफल मौजूद था।पुलिस की गाड़ी भी स्कार्पियो बताई जा रही है जो पुलिस विभाग द्वारा थानों को आवंटित गाड़ियों में से नही थी जिससे पहचान हो सके कि आरोपियों को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस ही है और जो लोग उनके घर से पकड़ कर आरोपी को गाड़ी में बैठा रहे हैं वे पुलिस वाले ही हैं। शंकर दयाल सिंह उर्फ फौजी का आपराधिक इतिहास होने और गंगा के दियारा में अपराधियों द्वारा हत्या किए जाने के बाद लगातार परिजनों के बीच अपराधियो द्वारा उनलोगों की हत्या किए जाने की आशंका बनी रहती है और बिना वर्दी के और बिना रायफल और पुलिस की गाड़ी से आरोपियों को गिरफ्तार करने के दौरान भी परिजनों और ग्रामीणों को इस बात का ही भय सता रहा था कि दियारे के अपराधी नीरज सिंह और अभिमन्यु सिंह को उठा कर ले जा रहे हैं। अपराधियो के संदेह में ही परिजन पुलिस के हाथों अभिमन्यु और नीरज को छुड़ाने के प्रयास में थे कि इसी बीच ग्रामीण भी जुट गए और उन्हें लगा कि दियारे के अपराधियों की एंट्री गांव में हो गई है और फौजी के पुत्रों को उठा कर ले जा रहे हैं। ग्रामीण अपराधी समझ कर पुलिस वालों से भीड़ गए और आरोपी को छुड़ा लिया। ग्रामीण सूत्रों के अनुसार इस घटना में महिलाएं शामिल नही थी और उनलोगों ने सिर्फ पुलिस द्वारा किये जा रहे दुर्व्यवहार और ज्यादती का विरोध किया।जिन लोगो से वो आरोपियों को छोड़ने की बात कह रही थी उस दौरान भी उन्हें यही पता था कि उनके घर अपराधियो ने धावा बोल दिया है। अब पुलिस ने इस मामले में नौ नामजद और पांच छः अज्ञात लोगों पर कई धाराओं में एफआईआर दर्ज कर लिया है।सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस एफआईआर में एससी ऐक्ट लगाया गया है। पुलिस ने मामले में एससी ऐक्ट लगाकर इस एफआईआर की सत्यता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।बताया जाता है कि फरना के आरोपियों और उनके परिजनों को यह पता भी नही था कि उनके घर पहुंचे लोग पुलिस हैं या अपराधी तो ये कैसे पता चल सकता है कि उनके साथ ज्यादती कर रहे और दो आरोपियों को अपने कब्जे में लेने वाले पुलिस कर्मी में कोई एससी श्रेणी से सम्बंधित हैं। इस बात की चर्चा भी जोरो पर है और लोग एससी ऐक्ट के दुरुपयोग की बात भी कह रहे हैं। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज करने के बाद गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की बात कह रही है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।परिजनों ने भी एसपी, डीआईजी और डीजीपी को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र

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