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बिहार

बजट को लेकर कायल हैं किसान और लघु उद्योग के कारोबारी

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बक्सर, 23 फरवरी (हि.स.)। बिहार विधानसभा में सोमवार को पेश किये गए बजट को लेकर बक्सर जिले के किसान और लघु उद्योग से जुड़े कारोबारी ने स्वागत किया है।इस बाबत स्थानीय किसानों का कहना है कि एक दौर यह भी था जब परम्परागत खेती के तहत हम धान और गेहूं की फसलों को ही अपने कृषि का आधार मानते थे, पर अब नये परिवेश में किसानों के प्रति वर्तमान सरकार की इक्छा क्ति ने किसानों की दिशा और दशा को पूरी तरह बदल डाला है। जिले में खुले कृषि विज्ञान केंद्र के सानिध्य में धान और गेहूं की खेती ये इतर खेतीबारी को लेकर बागवानी,मेंथा की खेती और सब्जियों के उत्पादन को भी खेती का हिस्सा मानकर हम अपने खेतों का भरपूर लाभ उठा रहे हैं। इस काम में डुमरांव स्थित कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़े वैज्ञानिकों का हमें पर्याप्त दिशा-निर्देश मिल रहा है। जिला कृषि विभाग के हवाले से बताया गया है कि पूर्व में जिले की साठ फीसदी खेतिहर जमीन पर स्थानीय किसानों द्वारा परम्परागत खेती की जा रही थी। शेष चालीस प्रतिशत भूभाग विभिन्न कारणों के चलते परती ही छूट जाती थी। पर अब ऐसा नहीं है कोरोना काल में लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों के आने से और कृषि विज्ञान केंद्र के उचित दिशा-निर्देश के बाद अब छूटी उन परती जमीनों पर बागवानी किसानों के लिए बरदान साबित हो रही है जहा किसान अपनी परती जमीन पर अमरूद,बैर,फूल और सब्जियों का उत्पादन कर आर्थिक रूप से सम्पन्न हुए हैं। बिहार सरकार द्वारा जारी बजट में किसान हितों को जिस तरह से तरजीह दी गई है, वह निश्चित ही किसानों के सुनहरे भविष्य की परिकल्पना का पोषक है और महाजनगिरी व बिचौलिये की परम्परा को खत्म करनेवाला है। किसानो से इतर बक्सर की बात करें तो इस बजट के दौरान जिले को चार बाईपासों की सौगात दी गई है। इस क्रम में बक्सर जासो पंचायत से विक्रमगंज को जोड़ने वाले बाईपास के अतिरिक्त जिला मुख्यालय के लिए चौसा प्रखंड से यूपी की सीमा तक जाने वाले बाईपास के अलावे डुमरांव अनुमंडल को भी दो बाईपास दिये गये हैं। इसे लेकर स्थानीय लोगों में हर्ष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि बाईपास निर्माण से बक्सर और डुमरांव के लोगों को जाम से मुक्ति मिल जायेगी। केंद्र व राज्य सरकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए स्थानीय खनिता,बसांव,महिला इटाढ़ी,जासो आदि गांवों के खेतिहर किसान स्थानीय पैक्स में क्षमता के अनुरूप निर्धारित मूल्यों पर धान की बेचा है। शेष बचे धान को कृषि रेल द्वारा देश की अलग-अलग मंडियों में भेज कर आर्थिक निर्भरता की दिशा में एक ठोस कदम उठाया है। ये किसान केंद्र व राज्य सरकारों को अपनी आर्थिक स्थिति में सुधार का वाहक मान रहे हैं।बजट में मिले सडको के जाल का स्थानीय व मंझोले व्यापारियों ने स्वागत करते हुए बताया की बाईपास बन जाने से हम अपने माल को अंतर जिला व अंतर प्रान्तों से सीधे जुड़ कर कम समय में माल की खपत कर आर्थिक सम्पन्नता की ओर बढ़ सकते हैं। हिन्दुस्थान समाचार /अजय मिश्रा/हिमांशु शेखर

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