मास्क निर्माण कार्य से मिला रोजगार : मंजू देवी

मास्क निर्माण कार्य से मिला रोजगार : मंजू देवी
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दरभंगा, 13 मई (हि.स.)। कोरोना महामारी के दौरान कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए सर्वाधिक उपयोगी एवं आवश्यक सामान मास्क है। जिसका निर्माण कार्य जीविका दीदीयों को मिलने से इस विपदा की घड़ी में इन्हें एक स्वरोजगार का अवसर सुलभ हुआ है। उल्लेखनीय है कि जिले के हायाघाट प्रखंड अंतर्गत जीविका समूह अप्रैल 2020 से ही मास्क निर्माण कार्य में लगा हुआ है। अबतक जहाँ कुल 1955 स्वयं सहायता समूह कार्यशील हैं तथा इनसे 22 हजार परिवार जुड़े हुए हैं। इन परिवारों की महिलाएँ विभिन्न स्व-रोजगार कार्य से जुड़कर अपना एवं अपने परिवार की जीविका चलाती हैं। प्रारंभ में हायाघाट प्रखंड में जीविका से जुड़ी मात्र 35 सदस्य थीं। जो सिलाई का काम करती थीं लेकिन वर्ष 2018 में जीविका परियोजना प्रबंधक, रोजगार प्रबंधक एवं प्रखंड परियोजना प्रबंधक के सतत् प्रयास से आर-सेट्टी के माध्यम से कुल 64 सदस्यों को सिलाई मशीन चलाने का प्रशिक्षण देकर स्व-रोजगार सृजन के लिए उन्हें योग्य बनाया गया। मार्च, 2020 से कोरोना संक्रमण के फैलने पर सरकार द्वारा मास्क निर्माण का आदेश दिए जाने के दौरान हायाघाट प्रखंड के 14 पंचायतों के 175 समूह प्रशिक्षित हो चुकी थीं। वर्ष 2020 में इन सदस्यों के द्वारा 1 लाख 65 हजार मास्क बनाया गया था। संकुल संघ, ग्राम संगठन द्वारा इन्हें प्रति मास्क 5 रुपये की दर से 1 लाख 65 हजार मास्क के लिये 8 लाख 25 हजार रुपये का भुगतान आपदा की घड़ी में किया गया था। वर्तमान में 175 समूहों द्वारा अब तक तीन लाख मास्क का निर्माण किया जा चुका है, जिसके लिए 15 लाख रुपये मजदूरी के रूप में भुगतान किया जायेगा। इस तरह मास्क निर्माण कार्य मिलने से कोरोना महामारी जैसी विपदा की घड़ी में इनको अपने परिवारों का भरण-पोषण करने में काफी सहूलियतेंं हो रही है। जिस हायाघाट प्रखंड के श्रीरामपुर पंचायत अंतर्गत हवासा गाँव निवासी रंजीत मांझी की पत्नी मंजू देवी बताती हैं कि वह अब तक 7000 मास्क बना चुकी है और आगे भी बनाने को तत्पर है। इस विपदा की घड़ी में 35 हजार रुपये की आमदनी होने पर उसे अपने परिवार का भरण-पोषण करने में काफी सहूलियतेें हुई है। वहीं मझौलिया पंचायत अंतर्गत होरलपट्टी गाँव निवासी छोटे शर्मा की पत्नी अमोला देवी, जिन्होंने नौ हजार मास्क का निर्माण कर 45 हजार रुपये अर्जित किया है, बताती हैं कि लाकडाउन जैसे विपरीत परिस्थितियों में इस स्वरोजगार से उनके परिवार को काफीी संबल प्राप्त हुआ है। हिन्दुस्थान समाचार/मनोज/चंदा

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