कुष्ठ पीड़ितों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू हुई मुख्यमंत्री नवजीवन योजना

कुष्ठ पीड़ितों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू हुई मुख्यमंत्री नवजीवन योजना
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बेगूसराय, 31 जनवरी (हि.स.)।कुष्ठ पीड़ितों को समाज की मुख्यधारा में शामिल करने तथा उनके प्रति भ्रांतियों को समाप्त करते हुए भेदभाव उन्मूलन के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा 'मुख्यमंत्री नवजीवन योजना' का शुभारंभ किया गया है। मुख्यमंत्री नवजीवन योजना के तहत राज्य के सभी ग्रेड-1 एवं ग्रेड-2 कुष्ठ पीड़ितों का सर्वे कर उन्हें पात्रता के अनुरूप सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए एक समविकास पोर्टल तैयार किया जाएगा। सामाजिक सुरक्षा निदेशालय के तहत संचालित यह नई योजना वस्तुतः कुष्ठ पीड़ितों के लिए पूर्व से क्रियान्वित बिहार शताब्दी कुष्ठ कल्याण योजना का स्थानापन्न है। मुख्यमंत्री नवजीवन योजना के शुभारंभ के बाद बिहार शताब्दी कुष्ठ कल्याण योजना के तहत नई स्वीकृति नहीं दी जाएगी, लेकिन वर्तमान लाभुकों को मासिक सहायता के रूप में मिल रहा 15 सौ रुपया उनके समाज की मुख्यधारा में शामिल होने तक जारी रहेगी। समाज की मुख्यधारा में शामिल होने एवं आर्थोपार्जन में सक्षम और आत्मनिर्भर होने के बाद इस योजना का लाभ मिलना स्वतः समाप्त हो जाएगा। इसके लिए वैसे कुष्ठ पीड़ित जो 60 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के असहाय वृद्ध हैं एवं वृद्धाश्रम में रहने के इच्छुक हैं, उन्हें वृद्धाश्रम में आवासित किया जाएगा। मुख्यमंत्री भिक्षावृति निवारण योजना के अंतर्गत स्वाबलंबन कार्यक्रम के तहत जिन कुष्ठ पीड़ितों को शामिल किया जाएगा, उन्हें भी बिहार शताब्दी कुष्ठ कल्याण योजना का लाभ नहीं मिलेगा, क्योंकि वह स्वयं अब जीविकपार्जन में सक्षम हो गए हैं। कुष्ठ पीड़ित जो दिव्यांगजन हैं, उन्हें स्वरोजगार के लिए क्रियान्वित स्वरोजगार ऋण का लाभ दिया जा सकता है। कौशल विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके एवं प्रशिक्षणोपरांत अपने आर्थोपार्जन में सक्षम कुष्ठ पीड़ितों को भी बिहार शताब्दी कुष्ठ कल्याण योजना का लाभ देय नहीं होगा। समाजिक सुरक्षा कोषांग के सहायक निदेशक भुवन कुमार ने बताया कि जिले में बिहार शताब्दी कुष्ठ कल्याण योजना के तहत 132 पात्र कुष्ठ पीड़ितों को लाभ के रूप में 15 सौ रुपए की मासिक सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री नवजीवन योजना के तहत अभियान चलाकर आशा कार्यकर्ता एवं अन्य सक्षम कर्मी के द्वारा कुष्ठ पीड़ितों की स्क्रीनिंग की जाएगी, ताकि कुष्ठ पीड़ितों को प्रारंभ में ही चिन्हित किया जा सके। स्क्रीनिंग एवं आरंभिक चिन्हिकरण के लिए कर्मी को समय-समय पर इस प्रकार से प्रशिक्षित किया जाएगा कि वे कुष्ठ पीड़ितों के स्क्रीनिंग में पूर्ण रूप से दक्ष हों। चिन्हित कुष्ठ पीड़ितों को प्राथमिक चिकित्सा केंद्र पर निबंधित कर समयबद्ध मुप्त चिकित्सीय उपचार किया जाएगा एवं समय-समय पर उनके पूर्ण स्वास्थ्य होने तक जांच जारी रहेगी। जटिल मामलों में उनके ईलाज के लिए जिला अस्पताल अथवा अन्य सरकारी अस्पताल में रेफर किया जाएगा, जहां उनका मुफ्त ईलाज किया जाएगा। विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत चिन्हित कुष्ठ पीड़ितों को उनकी पात्रता के अनुरूप आच्छादित करने हेतु मुख्यमंत्री भिक्षावृति निवारण योजना अंतर्गत कार्यरत आउटरिच वर्कर समविकास कार्यकर्ता का कार्य करेंगे, जो कुष्ठ पीड़ितों/परिवारों तथा विभाग के बीच कड़ी का कार्य करेंगे। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र-hindusthansamachar.in