राजेंद्र पुल के मरम्मती के लिए केंद्र सरकार ने मंजूर किए 80 करोड़

 राजेंद्र पुल के मरम्मती के लिए केंद्र सरकार ने मंजूर किए 80 करोड़
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बेगूसराय, 13 मई (हि.स.)। पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाले गंगा नदी पर बने राजेंद्र पुल पर एक बार फिर बड़े वाहनों का परिचालन शुरू करने का प्रयास तेज हो गया है। जल्द ही राजेंद्र पुल का मरम्मत कार्य शुरू होगा, इसके बाद बड़े वाहनों का परिचालन शुरू हो जाएगा। बेगूसराय के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के अनुरोध पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने राजेंद्र पुल के पूर्ण जीर्णोद्धार कार्य को मंजूरी दे दी है। राजेंद्र पुल की मरम्मती के लिए 80 करोड़ 87 हजार 640 रुपया की स्वीकृति दी गई है। प्राघिकरण ने कार्यकारणी की बैठक में राशि की मंजूरी कर इसे रेलवे द्वारा तकनीकी विशेषज्ञ एवं निविदा के आघार पर शीध्र पूरा करने को कहा है। यहां पर राजेंद्र पुल के समानांतर गंगा नदी पर नया सिक्स लेन पुल का निर्माण कार्य चालू रखने के कारण, इस पुल के जिर्णोद्धार का काम लटक गया था। पुल पर बड़े वाहनों का परिचालन बंद रहने से मचे हाहाकार का मुद्दा सांसद गिरिराज सिंह ने केन्द्रीय मंत्री नीतीन गडकरी के समक्ष उठाया था कि इस पुल की अपनी महत्ता है तथा फोर लेन पुल बनने में अभी समय लगेगा। गिरिराज सिंह ने गुरुवार को बताया कि बेगूसराय-पटना को जोड़ने वाले लाइफ लाइन सिमरिया पुल पर बड़ी गाड़ी का संचालन पिछले कई सालों से बंद है। जिसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी को धन्यवाद देता हूं जो वर्तमान में कोरोना से लड़ाई के साथ-साथ विकास का भी काम कर रहे हैं। इस पुल की मरम्मत के लिए केंद्र सरकार द्वारा 80 करोड़ स्वीकृत किए गए। यह बिहार के लोगों की सुविधा के लिए बड़ा कदम है। सांसद प्रतिनिधि अमरेंद्र कुमार अमर ने गुरुवार को बताया कि दिसम्बर माह में ही रेलवे द्वारा अनुमानित 80 करोड़ की राशि स्वीकृत करने का प्रस्ताव लिया था, लेकिन राशि आवंटन नहीं हो सका था। सांसद के हस्तक्षेप से राशि आवंटित हो जाने के बाद राजेंद्र पुल आमजन के लिए पुर्ण उपयोगी होगा तथा सभी वाहनों की आवाजाही फिर शुरू हो सकेगा। उल्लेखनीय है कि आजादी मिलने केेे बाद गंगा नदी पर सबसे पहला रेल-सह-सड़क पुल पटना एवं बेगूसराय के बीच बना तथा 1959 में पुल का उद्घाटन किया गया था। जिसके बाद बीच-बीच में मरम्मत कर परिचालन जारी रहा। 2009 में गार्टर में दरार आ गई, जिसका 2012 तक मरम्मत नहीं होने के बाद बेगूसराय के सामाजिक कार्यकर्ता अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार अमर ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी जुटाई और अधिवक्ता गोपाल कुमार के सहयोग से पटना उच्च न्यायालय में पीआईएल दायर किया गया था। हाई कोर्ट की कड़ाई और तत्कालीन सांसद डॉ. भोला सिंह द्वारा संसद में मामला उठाये जाने पर करीब 20 करोड़ खर्च कर मरम्मत किया गया। लेकिन 16 टन से अधिक भारी बहन परिचालन पर रोक के बावजूद पुलिस द्वारा पैसा लेकर 70-80 टन भारी वाहन पास करवाया जाता रहा। जिसके कारण पुल की हालत नाजुक हो गई और अगस्त 2019 में इस पुल पर बड़े वाहनों का परिचालन पूरी तरह से रोक दिया गया। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/चंदा

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