'कथा' ने दिखा दी प्रेम और पानी के साथ ऊंच-नीच के लड़ाई की व्यथा

'कथा' ने दिखा दी प्रेम और पानी के साथ ऊंच-नीच के लड़ाई की व्यथा
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बेगूसराय, 24 मार्च (हि.स.)। सुधांशु फिरदौस के नाट्य आलेख 'कथा' ने बेगूसराय में भारतीय समाज एवं व्यवस्था के दोहरे चरित्र पर तीखे रूप से सवाल उठाया है। बेगूसराय के विप्लवी पुस्तकालय गोदरगावां के सभागार में मंगलवार की रात मंचित 'कथा' ने पुस्तकालय के 91वें वार्षिकोत्सव के अवसर पर जुटे देेश के चर्चित साहित्यकारों, पत्रकारों, कवियों को अमीर-गरीब, ऊंच-नीच की लड़ाई के साथ प्रेम और पानी के लिए होने वाली जंग से रूबरू करवा दिया। देश के चर्चित निर्देशक प्रवीण कुमार गुंजन के परिकल्पना एवं निर्देशन में द फैक्ट रंगमंडल द्वारा मंचित कथा में कलाकारों ने एक गंभीर और जटिल विषय को रोचक तरीके से दर्शकों के सामने रखा। 'हे राम, मेरे राम, सबके राम सियाराम' से शुरू कथा ने जताया कि संसार आधे अधूरे कथाओं का ही जाल है। ना कथा पूरी होती है और ना ही संसार। ऊपर वाले ने हर दूसरे को पहले से कमजोर बनाया है, जिससे असमानता फैल रही है। जल की विकट समस्या बन रही है, दुनिया में लोग पानी के लिए पानी पानी हो रहे हैं। प्रेम और पानी के लिए युद्ध तो शुरू ही है, शायद अगला विश्व युद्ध इसी मुद्दे को लेकर हो। भारतीय समाज में पानी और प्रेम का अपना अलग महत्व है। प्रेम पर समाज ने हमेशा से अघोषित पहरा बिठा रखा है। वहीं, पानी के लिए भी कमजोर को बहुत कुर्बानी देनी पड़ी है। कहने को हम भले ही सभ्य हो गए हों लेकिन आज भी कमोबेश हालात वही है, जो सैकड़ों वर्ष पहले थी। महिलाओं को आज भी हमारे समाज में उचित सम्मान नहीं मिल पाया है। महिलाओं को गुलाम समझने वाली मानसिकता बदली नहीं है। पानी की तलाश में भटकते लोग तथा प्रेम कहानी से शुरू कथा प्रेम संबंध से गुजरते हुए प्रेम की परीक्षा देने के बाद भी पूरा नहीं होने पर आकर समाप्त हो जाता है। एक जटिल समस्या को इंगित करते नाटक कथा में गुड़िया (मंजरी मणि त्रिपाठी ) और लोचन (वैभव कुमार) ने युवा मन की बात कहते हुए अपनी छाप छोड़ी। गुड़िया के पिता और भाई नहीं चाहते हैं कि वह किसी से प्रेम करे। गुड़िया अपनी जिंदगी खुद जीना चाहती है, लेकिन इसका खामियाजा उसे जान देकर चुकाना पड़ता है और गुड़िया को मारकर उसके घर वाले नदी में बहा देते हैं। 'कथा' कहने वाले चंदन कुमार वत्स एवं अंकित शर्मा ने पूरे मनोयोग के साथ नाटक के सूत्र को अपने अभिनय से पिरो दिया। बाप- देवानंद सिंह, सूरज- कमलेश ओझा, चरितर- चंदन कश्यप, मलंग- मो रहमान, नौकर- जितेंद्र कुमार एवं मैच रेफरी की भूमिका में सैंटी कुमार ने अपनी कला से दर्शकों को खूब रिझाया तथा तालियां बटोरी। संगीत निर्देशक अमरेश कुमार, प्रकाश परिकल्पना कर रहे चिंटू कुमार एवं ध्वनि परिकल्पना कर रहे अजय कुमार भारती के साथ वाद्य यंत्र पर मौजूद दीपक, रविकांत तथा गायन में लगे लालबाबू, अमरेश, रिमझिम और पूजा ने द फैक्ट रंगमंडल के प्रस्तुति को बेहतरीन मुकाम दिया। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/चंदा

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