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बिहार

गुलामी की जंजीर से तोड़ने की कहानी दिखा गया 'आजादी मेरा ब्रांड'

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बेगूसराय, 14 अप्रैल (हि.स.)। कहने को तो हम प्रगतिशील होते जा रहे हैंं। लेकिन आज भी महिलाओं की क्या स्थिति है, यह किसी से छिपा हुआ नहीं है। उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होकर आत्मनिर्भर बनने, अपनी जिंदगी जीने के लिए कितने संघर्षों का सामना करना पड़ता है, यह हर कोई जानता है सिर्फ बोलते नहीं। बेगूसराय में मंगलवार की रात मंचित आजादी मेरा ब्रांड' ने इस पर जमकर प्रहार किया है। फैक्ट् रंगमंडल की नई नाटय प्रस्तुति आजादी मेरा ब्रांड का शानदार मंचन रतनपुर स्थित फैक्ट् स्पेस में किया गया। अनुराधा बेनीवाल की मूल रचना और उनकी जीवन यात्रा पर आधारित नाटक का परिकल्पना एवं निर्देशन ख्याति प्राप्त रंग निर्देशक प्रवीण कुमार गुंजन ने किया। कुंठित मानसिकता के खिलाफ, औरतों को गुलामी की मानसिकता की जंजीर को तोड़ने की कहानी है आजादी मेरा ब्रांड। अपनी जीवन यात्रा में अनुराधा बेनीवाल औरतों को घर से निकलने जहां तक निकल कर जा सकती है वहां तक निकलने का संदेश देती है। नाटक महिलाओं की आजादी को लेकर एक अहम मुद्दा उठाती है। पूरी सभ्यता और संस्कृति ल़डकियों की आजादी को लेकर बात करती है लेकिन, आए दिन देश में लड़कियां बच्चियां बलात्कार का शिकार होती हैै, नाटक इसपर सवाल उठाता है। आखिर क्यों हमारे देश में लड़कियां खुले मन से घूम नहीं सकती है, सिर्फ लड़की होने भर से उसे कमजोर क्यों आंका जाता हैै, क्यों उसे अपने मन मुताबिक जीने की आजादी नहीं मिल पाती है। नाटक में एकल अभिनय कर रही शिल्पा भारती अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के मन तक पहुंचने में सफल रही। एक लड़की होते हुए वह विदेशों में घूमते हुए जैसा महसूस करती है, अपनी किताब में उसी बेबाकी के साथ लिखा भी है। इसे शिल्पा भारती ने उसे बड़े सहजता से सामने बैठे दर्शकों तक पहुंचाया। दृश्य दर दृश्य अलग-अलग देशों की यात्रा महसूस कराता रहा। मंच पर हल्के फुल्के चीजों का उपयोग कर प्रवीण गुंजन ने जो दृश्य तैयार किए, वह काबिले तारीफ थी। प्रत्यक्ष संगीत में गोरिये ने लोगों का मन मोह लिया। संगीत चंदन कुमार वत्स, अमरेश कुमार एवं दीपक कुमार का, साउंड मो. रहमान का और प्रकाश परिकल्पना चिंटू मुनि का था। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/ चंदा