22 वीं पुण्यतिथि पर याद किए गए जनकवि बाबा नागार्जुन
22 वीं पुण्यतिथि पर याद किए गए जनकवि बाबा नागार्जुन
बिहार

22 वीं पुण्यतिथि पर याद किए गए जनकवि बाबा नागार्जुन

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बेगूसराय, 05 नवम्बर (हि.स.)। आधुनिक हिंदी साहित्य में प्रगतिशील काव्य धारा के प्रमुख कवि बाबा नागार्जुन की 22 वीं पुण्यतिथि तिथि गुरुवार को सुखदेव सिंह समन्वय समिति के तत्वाधान में सर्वोदय नगर में मनाई गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिक्षक नेता अमरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि हिंदी एवं मैथिली साहित्य के आधुनिक काल में प्रगतिशील धारा के प्रमुख रचनाकार बाबा नागार्जुन का काव्य एवं कथा साहित्य में समान रूप से योगदान रहा है। राष्ट्रवादी रचना और सामाजिक संघर्षशील के कारण उन्हें आधुनिक कवि का सम्मान प्राप्त हुआ है। मौके पर पूर्व मेयर आलोक कुमार अग्रवाल ने कहा कि बाबा नागार्जुन रूढ़िवादी विचारधारा के घोर विरोधी थे। उन्होंने काव्य रचनाओं के माध्यम से तत्कालीन भारतीय समाज का चित्र खींचा है। वह कबीर की तरह ही अपनी रचनाओं में व्यंग भरा है। हिंदी मैथिली के साथ ही संस्कृत के संस्कारी कवि के रूप में भी मुखर हुए हैं। साहित्यकार डॉ. चंद्रशेखर चौरसिया ने कहा कि बाबा नागार्जुन बहुआयामी प्रतिभा के धनी साहित्यकार और विचार के मार्क्सवादी थे। उनके व्यक्तित्व में ठेठ देशी संस्कार रचे बसे थे, रचनाओं से गांव की सोंधी खुशबू आती है। ग्रामीण किसान मजदूर इस तरह की भाषा समझते और बोलते हैं, उसका निखार हुआ काव्यात्मक रूप झलकता है। वह सच्चे अर्थों में भारतीय युग धारा के कवि थे। मौके पर जेपी सेनानी के प्रदेश महासचिव डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह, डॉ. ललिता कुमारी, महिला सेल सचिव सुनीता देवी, छात्र अनिकेत कुमार पाठक, ज्ञान चंद्र पाठक एवं अधिवक्ता राजेंद्र महतों ने भी उनकी रचनाओं के आयाम पर प्रकाश डाला। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र-hindusthansamachar.in