'स्वस्थ समाज के लिए स्तनपान का संकल्प' के लिए  शुरू हुआ विश्व स्तनपान सप्ताह
'स्वस्थ समाज के लिए स्तनपान का संकल्प' के लिए शुरू हुआ विश्व स्तनपान सप्ताह
बिहार

'स्वस्थ समाज के लिए स्तनपान का संकल्प' के लिए शुरू हुआ विश्व स्तनपान सप्ताह

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बेगूसराय, 01 अगस्त (हि.स.)। नवजात के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष भी शनिवार से विश्व स्तनपान सप्ताह शुरू हो गया। सात अगस्त तक चलने वाले स्तनपान सप्ताह के इस वर्ष का थीम है 'स्वस्थ समाज के लिए स्तनपान का संकल्प।' उद्देश्य है शिशु के जन्म के पहले घंटे के अंदर मां का पहला गाढ़ा दूध पिलाने, छह माह तक सिर्फ स्तनपान कराना, कंगारू मदर केयर एवं गृह आधारित नवजात की देखभाल (एचबीएनसी) के बारे में जागरूक और उनको प्रेरित करना । इसी को लेकर चेरिया बरियारपुर के आंंगनबाड़ी केंद्र संख्या-75 अर्जुन टोल में सेविका सुमन कुमारी द्वारा स्तनपान जागरूकता के लिए धात्री माताओं को राखी बांध कर अपने बच्चों को छह महीने तक केवल स्तनपान और छः महीने के बाद स्तनपान के साथ ऊपरी आहार संग स्तनपान कराने का वचन लिया। मौके पर मौजूद पिरामल फाउंडेशन के दीपक मिश्रा ने बताया कि शिशु के सर्वांगीण विकास के लिए जन्म के एक घंटे के भीतर मां का पहला दूध पिलाना, छह माह तक शिशु को सिर्फ स्तनपान कराना और दो वर्ष तक बच्चे को पूरक आहार के साथ स्तनपान कराना चाहिए। इसका शिशु एवं बाल जीवितता पर अहम प्रभाव पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं यूनिसेफ इस बात पर बल देते हैं कि कोविड से ग्रसित मां को भी शिशु को स्तनपान कराना चाहिए। अभी तक किसी भी शोध से यह नहीं साबित हुआ है कि वायरस मां के दूध से शिशु में पहुंच सकता है। उन्होंने बताया कि आंकड़ों के अनुसार जिन शिशुओं को जन्म के एक घंटे के अंदर स्तनपान नहीं कराया जाता है, उनमें मृत्यु दर की संभावना 33 प्रतिशत अधिक होती है (उन शिशुओं के सापेक्ष जिन्हें जन्म के 24 घंटे के पहले स्तनपान की शुरुआत कराई जाती है)। छह माह की आयु तक शिशु को केवल स्तनपान कराने पर सामान्य रोग जैसे दस्त एवं निमोनिया के खतरों में 11 एवं 15 प्रतिशत की कमी लाई जा सकती है। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/विभाकर-hindusthansamachar.in