सरकार समस्याओं से अनभिज्ञ, जैविक खेती से दूर हो रहे किसानः कांग्रेस
सरकार समस्याओं से अनभिज्ञ, जैविक खेती से दूर हो रहे किसानः कांग्रेस
बिहार

सरकार समस्याओं से अनभिज्ञ, जैविक खेती से दूर हो रहे किसानः कांग्रेस

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पटना, 27 जुलाई (हि.स.)। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य इन्तेखाब आलम ने सोमवार को कहा कि किसान जैविक खेती से दूर हो रहे हैं। मौजूदा सरकार किसानों की समस्याओं से अनभिज्ञ है। बिहार एक ऐसा राज्य है जहां 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर करती है। किसान अधिक उपज पाने के लिए अत्यधिक मात्रा में रसायन खाद का उपयोग करते हैं। अत्याधिक रसायनयुक्त अनाज का सेवन करने से कई प्रकार की बीमारियां होती है और मिट्टी भी खराब और पथरीली हो जाती है। उन्होंने कहा कि राज्य में जैविक खेती की पर्याप्त संभावनाएं हैं, लेकिन कीमत नहीं मिलने के कारण किसान इससे पूरी तरह जुड़ नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महज 25 प्रतिशत भूमि का उपयोग ही जैविक कृषि के लिए हो रहा है। बिहार में जैविक खेती नहीं होने के कारणों की पड़ताल में सामने आया कि खुद राज्य सरकार ही इसे लेकर गंभीर नहीं है। प्रोत्साहन और जागरूकता के लिए ठोस कदम नहीं उठाने के कारण जैविक खेती अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है। जैविक खेती के प्रति किसानों का रुझान नहीं होने के पीछे सबसे बड़ा और महत्त्वपूर्ण कारण यह है कि उनके उत्पादों को बेचने के लिए अभी तक कोई अधिकृत सरकारी केंद्र नहीं है। अगर बाजार मिले तो किसान जैविक खेती के लिए स्वेच्छा से आगे आएंगे। आलम ने कहा कि सरकार राज्य की सभी कृषि उपज मंडियों में जैविक उत्पादों की बिक्री और प्रचार-प्रसार के लिए अलग काउंटर बनाए। खरीदार तक जानकारियां पहुंचाने के सभी उचित माध्यम अपनाए ताकि किसानों को भी फसल की उचित कीमत मिल सके। उन्होंने कहा कि कृषि विशेषज्ञों की मानें तो रासायनिक के भारी उपयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए जैविक खाद का उपयोग शुरू होने के दो-तीन फसल बाद वह सामान्य स्थिति में आती है। उसके बाद पहले से भी उपजाऊ और बेहतर फसल मिलनी शुरू हो जाती है। सरकार को चाहिए कि कृषि नीति में जैविक खेती के लिए अलग प्रावधान जोड़े और सब्सिडी शुरू की है लेकिन वह काफी कम है। वह भी किसानों तक नहीं पहुंच पा रही है। जैविक खेती के खरीदार बहुत हैं लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि प्रदेश में कहां जैविक खाद का उत्पादन कहां हो रहा है और किसान खरीद कहां से करें। दोनों का प्लेटफॉर्म अभी तक तैयार नहीं हुआ है। हिन्दुस्थान समाचार/राजीव/विभाकर-hindusthansamachar.in