विश्वकर्मा पूजा के मौके पर इस वर्ष बन रहा है  सिद्धि योग
विश्वकर्मा पूजा के मौके पर इस वर्ष बन रहा है सिद्धि योग
बिहार

विश्वकर्मा पूजा के मौके पर इस वर्ष बन रहा है सिद्धि योग

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बेगूसराय, 16 सितम्बर (हि.स.)। शिल्प देव भगवान विश्वकर्मा पूजन उत्सव की तैयारी पूरी कर ली गई है। 17 सितंबर यानी गुरुवार को विश्वकर्मा जयंती पर औद्योगिक संस्थानों समेत औजार से संबंधित काम करने वाले तमाम व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को साफ सुथरा कर सजा दिया गया है। दोपहिया एवं चार पहिया वाहन शोरूम में बुधवार से ही भीड़ लगने लगी है। वाहन खरीदने वाले एडवांस बुकिंग करा चुके हैं, ताकि विश्वकर्मा पूजा के दिन शुभ मुहूर्त में वाहन अपने घर लाकर पूजा-अर्चना कर सकें। बाजार में सड़कों के किनारे सजावट की दुकानें सज गई हैंं। कोरोना के कारण इस वर्ष उमंग कम है। इसके बावजूद मूर्तिकारों ने भगवान विश्वकर्मा की छोटी-छोटी मूर्तियां बनाकर उन्हें अंतिम रूप दे दिया है। इस वर्ष विश्वकर्मा पूजा के मौके पर सिद्धि योग बन रहा है। कई दशक के बाद विश्वकर्मा पूजा के दिन पितृपक्ष की समाप्ति हो रही है। पितरों के मोक्ष और सुख समृद्धि की कामना के बाद भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से सकल मनोरथ की पूर्ति होगी। ज्योतिष अनुसंधान केंद्र गढ़पुरा के पंडित आशुतोष झा ने बताया कि सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश करने पर विश्वकर्मा पूजन किया जाता है। इस वर्ष सुबह 10:32 से शाम 4:56 तक पुण्य काल बहुत ही उत्तम है। सूर्य के कन्या राशि में इस संक्रांति काल में भगवान विश्वकर्मा की पूजा करनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि विश्वकर्मा पूजा ही एक ऐसा पूजा है जो अंग्रेजी तारीख के अनुसार होती है। हाल के कुछ वर्षों में अंग्रेजी तारीख के अनुसार पुण्य काल में बदलाव होए हैं, लेकिन ऐसा मौका बहुत ही कम आता है और प्रत्येक वर्ष लोग 17 सितम्बर को ही शिल्प देव भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/विभाकर-hindusthansamachar.in