विधानसभा चुनाव : भाजपा की हालत एक अनार सौ बीमार वाली, हो सकता है भितरघात
विधानसभा चुनाव : भाजपा की हालत एक अनार सौ बीमार वाली, हो सकता है भितरघात
बिहार

विधानसभा चुनाव : भाजपा की हालत एक अनार सौ बीमार वाली, हो सकता है भितरघात

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बेगूसराय, 07 सितम्बर (हि.स.)। बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा अब कभी भी हो सकती है। बेगूसराय जिला के सभी सात सीटोंं पर टिकट लेने वाले दो सौ से भी अधिक प्रत्याशी मैदान मैदान में कूद पड़े हैं। दोनों गठबंधन के अलावा बाहर घूम रहे दलों से भी बहुत प्रत्याशी दिखने लगे हैं। लेकिन सबसे अधिक मारामारी भाजपा में है। भाजपा में जिले के सात विधानसभा सीटों के दावेदारों की संख्या जोड़ दी जाय तो वह एक सौ से अधिक होगी। हर क्षेत्र के अपने मन मिजाज के अनुसार दावेदार हैं। जिले की सात सीटों में एनडीए में भाजपा को कितनी सीटें मिल पाती हैं यह गठबंधन के दलों के सीटों के तालमेल के बाद ही पता चल पाएगा। लेकिन जिले के भाजपाई अपने आकलन के अनुसार टिकट के लिए गोटी फिट करने में लगे हैं। पिछले बरसों में जिले में भाजपा के सदस्यों और समर्थकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। खासकर 2010 के विधानसभा चुनाव के बाद जिले में भाजपा का राजनीतिक वर्चस्व चरम पर पहुंच गया। लेकिन, 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, जदयू, राजद के गठजोड़ ने भाजपा सहित एनडीए के एक भी विधायक को जीतने नहीं दिया। जबकि, बेगूसराय संसदीय सीट पर भोला सिंह काबिज थे। बेगूसराय, बखरी और बरौनी के उसके सीटिंग विधायक चुनाव हार गए। उसके सहयोगी लोजपा को एक भी सीट नसीब नहीं हुई। लेकिन, इसका बदला भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में वसूल लिया, जब भाजपा के गिरिराज सिंह ने प्रतिद्वंद्वी दो पार्टियां सीपीआई के कन्हैया कुमार और राजद कांग्रेस के तनवीर हसन को मिलें वोटों के जोड़ से भी अधिक वोट लाकर दोनों को पराजित कर दिया। जिले के सभी सातों सीट पर भाजपा के कैंडिडेट को बढ़त मिली और राजद तथा सीपीआई के कैंडिडेट बहुत पीछे रह गए। राजद, कांग्रेस के विधायक भी अपने-अपने क्षेत्रों में राजद कैंडिडेट को बढ़त नहीं दिला सके। जबकि, जिले के सात क्षेत्रों में से पांच पर राजद और कांग्रेस के विधायक काबिज थे। समाजवाद और राजनीति को लेकर लगातार लिखने पढ़ने वाले महेश भारती कहते हैं कि लोकसभा चुनाव से उत्साहित भाजपा में वर्तमान विधानसभा चुनाव में हर क्षेत्र के लिए भावी विधायक का सपना संजोए नेताओं की बाढ़ आ गई है। गठबंधन में भाजपा को जिले की दो या तीन सीटें मिल सकती है। इनमें बेगूसराय, बखरी और तेघड़ा शामिल हैं। यदि तेघड़ा की सीटिंग सीट वाले विधायक के जदयू में जाने के बाद उनके लिए जदयू दुबारा यह सीट ले लेती है तो भाजपा की कोशिश बछवाड़ा की सीट झटकने को रहेगी। भाजपा के बेगूसराय सीट के लिए आधे दर्जन से अधिक नेता की दावेदारी चर्चा में है। भाजपा जिलाध्यक्ष राजकिशोर सिंह, पूर्व विधायक सुरेंद्र मेहता, पूर्व जिलाध्यक्ष संजय सिंह एवं संजय कुमार, जयराम दास, अमरेन्द्र कुमार अमर, प्रो. संजय गौतम, युवा नेता कुंदन कुमार, राजीव कुमार सहित पर्दे के पीछे से टिकट को लेकर इच्छुक कई अन्य लोगों की निगाहें राज्य नेतृत्व के निर्णय पर टिकी है। इसी तरह तेघड़ा सीट पर दिग्गज नेता रामलखन सिंह, पूर्व विधायक ललन कुंवर सहित कई अन्य नामों की चर्चा है। बखरी में पूर्व विधायक रामानंद राम के साथ रामशंकर पासवान सहित कई अन्य नामों की चर्चा है। देखना है जिले में भाजपा को कितनी और कौन-कौन सीटें मिलती हैं और कौन वहां से उम्मीदवार बनते हैं। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद यह भी तय है कि सभी सीटों पर भितरघाट होगा। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/चंदा-hindusthansamachar.in