वज्रपात  से बिहार में 12 लोगों की मौत
वज्रपात से बिहार में 12 लोगों की मौत
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वज्रपात से बिहार में 12 लोगों की मौत

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तेज बारिश व बिजली ने सूबे के आठ जिलों में बरपाया कहर मौसम विभाग ने फिर जारी की तेज बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट पटना, 15 सितम्बर (हि.स.) । बिहार में मंगलवार को हुई तेज बारिश और वज्रपात से 12 लोगों की मौत हो गई। सबसे अधिक मौत वैशाली जिले के राघोपुर में हुई है। राघोपुर पूर्वी पंचायत में ठनका की चपेट में आकर चार लोगों की मौत हुई है। सारण जिले के पानापुर में बिजली गिरने से दो बच्चियों की मौत हो गई। भोजपुर जिले के उदवंत नगर में दो लोगों की मौत हुई। मृतकों में एक छात्रा भी शामिल है। वह कॉलेज से घर लौट रही थी, तभी उस पर बिजली गिर गई। आकाशीय बिजली ने वैशाली और भोजपुर के अलावा सारण, बेगूसराय, सुपौल, कैमूर और अररिया में भी कहर बरपाया है। बेगूसराय जिले के डंडारी थाना क्षेत्र में ठनका गिरने से एक महिला की मौत हो गई। अररिया जिले के फारबिसगंज प्रखंड के पुरवारी झिरवा में वज्रपात की चपेट में आने से मो. सदरूल की मौत हो गई। सुपौल जिले के बसंतपुर प्रखंड के कोचगामा में ठनका गिरने से 37 साल के मोहम्मद नासिर की मौत हो गई। कैमूर जिले के चैनपुर के लोहरा गांव में ठनका गिरने से एक किशोर की मौत होने की सूचना है। मौसम विभाग ने जारी किया भारी बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट मौसम विभाग ने मंगलवार को बिहार के कई जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। विभाग ने कहा है कि अगले छह घंटे तक उत्तर बिहार में भारी बारिश की संभावना है। विभाग ने लोगों से इस दौरान एहतियात बरतने की अपील की है। विभाग ने रोहतास, कैमूर, शेखपुरा, नवादा, सारण और बक्सर में बिजली गिरने की संभावना जताई है। विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी से हवा नमी लेकर उत्तर बिहार की ओर बढ़ रही है, जिसके चलते उत्तर बिहार में भारी बारिश हो सकती है। आपदा प्रबंधन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। पटना में भी बदला मौसम राजधानी पटना का मौसम मंगलवार को चंद घंटे में बदल गया। सुबह से दोपहर तक उमस और गर्मी थी। दोपहर में आसमान में काले बादल छा गए। हल्की हवा चली इसके बाद भारी बारिश हुई। करीब दो घंटे हुई बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली है। औसतन 300 मौतें हर साल, जानकारी के अभाव में मौत का औसत पार बिहार में वज्रपात से औसतन हर साल 300 मौतें होती रही हैं , लेकिन इस साल यह आंकड़ा इस औसत को पार कर चुका है। बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग की बैठकों में सलाह के लिए बुलाए जाने वाले वज्रपात सुरक्षित भारत अभियान के संयोजक कर्नल संजय श्रीवास्तव के अनुसार आकाशीय बिजली से बचने के उपायों की जानकारी लोगों तक नहीं पहुंच रही है, जिसके कारण शहरों की अपेक्षा बिहार की ग्रामीण आबादी इसकी शिकार ज्यादा हो रही है। शहरों में ज्यादातर भवनों पर तड़ित रोधक (लाइटनिंग अरेस्टर) और तड़ित चालक (लाइटनिंग कंडक्टर) लगे रहते हैं, इसलिए वह बिजली को खींचकर अर्थिंग के जरिए जमीन तक भेज देते हैं, जबकि गांवों में खुले खेतों में पड़े लोहे-तांबे के सामान, जलस्रोत, ऊंचे पेड़ आकाशीय बिजली को आकर्षित कर लेते हैं। इसके आसपास रहे लोगों की आकाशीय बिजली के करंट या तेज आवाज से धड़कन रुक जाती है या जलकर मौत हो जाती है। हिन्दुस्थान समाचार/राजीव रंजन/विभाकर-hindusthansamachar.in