लोकतंत्र में बहुत ही ऊंचा स्थान रखता है विरोध का भाव : प्रो. राकेश सिन्हा
लोकतंत्र में बहुत ही ऊंचा स्थान रखता है विरोध का भाव : प्रो. राकेश सिन्हा
बिहार

लोकतंत्र में बहुत ही ऊंचा स्थान रखता है विरोध का भाव : प्रो. राकेश सिन्हा

news

- नहीं होनी चाहिए सत्ता में चिपक कर जनता के साथ गद्दारी करने की महत्वाकांक्षा - जो सत्ता में थे लोग उन्हें याद नहीं करते हैं, जो सत्ता में नहीं थे वे संदर्भ बिंदु बन जाते हैं बेगूसराय, 22 नवम्बर (हि.स.)। राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) विचारक प्रो. राकेश सिन्हा ने कहा है कि भारतीय समाज में योग्यता, कर्मठता और ईमानदारी की प्रतिमूर्ति हर गली हर चौराहे पर हैं। यह भारतीय समाज को मजबूत कर रहे हैं। ईमानदारी और मूल्यों की समानता होनी चाहिए। राजनीति के चरित्र में ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और अपने शपथ के प्रति संतुलन का भाव होना चाहिए। अपने गृह जिला बेगूसराय के तीन दिवसीय दौरे पर आए राकेश सिन्हा ने कहा है कि लोकतंत्र में विरोध का भाव बहुत ही ऊंचा स्थान रखता है। इससे गति मिलती है, कुछ नया करने की प्रेरणा मिलती है। जयप्रकाश नारायण को भी अपने समकालीन भारत में अनेक आलोचनाओं का सामना करना पड़ा लेकिन उन्हीं आलोचनाओं के बीच रहकर वे संदर्भ बिंदु हैं। जो सत्ता में थे उन्हें लोग याद नहीं करते हैं, जो सत्ता में नहीं थे वे आज संदर्भ बिंदु बन जाते हैं, यही राजनीति का वैशिष्ट्य भाव है। राजनीति हमेशा उन बातों को हमारे सामने परोसती है जो वर्तमान और भविष्य के बीच पुल का काम करते हैं। जनप्रतिनिधि रहूं या ना रहूं, जीवन और चरित्र मेरा अपना है, अपनी कर्मठता किसी के हवाले नहीं किया है। असमानता राजनीतिक हो, सामाजिक हो या आर्थिक हो, उसे दूर करना चाहिए। यह दूर करने की जिम्मेदारी उन लोगों की है जो सार्वजनिक जीवन में जनप्रतिनिधि होने का दावा करते हैं। संसद में हों, विधानसभा में हों या बाहर हों, उन्हें यह जिम्मेदारी निभानी होगी। चार्टर्ड अकाउंटेंट का ऑडिटिंग किए गए ईमानदारी और समाज के द्वारा ऑडिटिंग किए गए ईमानदारी में बहुत बड़ा अंतर है। आज का जयप्रकाश नारायण, आचार्य कृपलानी, दीनदयाल उपाध्याय हमें बनना पड़ेगा। ऐसी परिस्थिति पैदा करनी पड़ेगी कि आने वाली पीढ़ी हमें उद्धृत करें। हमारी महत्वाकांक्षा दीनदयाल उपाध्याय और जयप्रकाश नारायण बनने की होनी चाहिए। हमारी महत्वाकांक्षा सत्ता में चिपक कर जनता के साथ गद्दारी करने की नहीं हो, लेकिन ऐसे सैकड़ों सांसद बिहार से आए और गए। जनप्रतिनिधि और सांसद का कर्तव्य है कि जो समस्या सामने आता है उसे मजबूती से उठाएं और समाधान में लग जाएं। मैं समस्या उठाता हूं और समाधान में लग जाता हूं। सभी मुद्दों पर नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार काफी सजग है, सतर्क है। नरेन्द्र मोदी बार-बार कहते हैं कि क्षेत्र में जाते रहिए, उन्होंने सांसदों को जन समस्या के समाधान के लिए चलता फिरता गाड़ी बना दिया है। चुनावी कीड़े जब अपने-अपने बिल में घुस कर सो गए, तब मैं अपनी गतिविधियां तेज कर चुका हूं। जब किसान संगठित होंगे, जनमत होगा तो सरकार चाहे जिसकी भी हो, जैसी भी हो उसे बात माननी पड़ेगी। नरेन्द्र मोदी गुजरात में तीन सौ किलोमीटर तक पानी पहुंचा सकते हैं तो हम दो किलोमीटर तक ड्रेनेज से पानी बाहर नहीं कर सकते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/रामानुज-hindusthansamachar.in