मंजूषा कला को मास्क निर्माण से जोड़ने की योजना
मंजूषा कला को मास्क निर्माण से जोड़ने की योजना
बिहार

मंजूषा कला को मास्क निर्माण से जोड़ने की योजना

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खगड़िया, 31 जुलाई (हि.स.)। अंग क्षेत्र की कला और संस्कृति को प्रोत्साहित कर गरीबी और लाचारी में जी रहे कलाकारों को एक नई पहचान के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जा सकते हैं। मधुबनी पेंटिंग की तरह मंजूषा कला में अपार संभावनाएं विद्यमान हैं। खगड़िया के जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष ने मंजूषा पेंटिंग कला को बढ़ावा दिए जाने की दिशा में पहल कर आमलोगों से अनुरोध करते हुए कहा है कि अंग प्रदेश की इस कला को प्रोत्साहित कर हम स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान कर सकते हैं।इससे कलाकारों की आय का स्रोत विकसित होगा वहीं लोक कला और विलुप्त हो रही संस्कृति को भी हम बचा सकेंगे। जिलाधिकारी ने कहा है कि मास्क व्यवसाय से जुड़े कलाकार मंजूषा पेंटिंग को लेकर यदि इस कला को बढ़ावा देने को इच्छुक हैं तो उन्हें जिला प्रशासन की ओर से हर संभव सहयोग मिलेगा। जिलाधिकारी ने कहा कि बिहार में कला की विविधता है। उन्होंने कहा कि मधुबनी कला के साथ इस कला को भी बढ़ावा देने की जरूरत है। मंजूषा कला अंग क्षेत्र की एक विशेष हस्तकला है जिसमें एक लोक गाथा बिहुला विषहरी से जुड़ी पौराणिक बातों को चित्र के माध्यम से कपड़े और दीवारों पर उकेरा जाता है। मुख्य रूप से बिहुला विषहरी से जुड़े प्रतीक चिन्ह जैसे सर्प, सूर्य देवता, भगवान शंकर, मनसा देवी, हाथी, चंपा नगरी के लोग, शिवलिंग, चंदू सौदागर आदि को कलाकार अपनी कला साधना का प्रतीक बनाकर अपनी कल्पना की चित्रात्मक प्रस्तुति करते हैं। उल्लेखनीय है कि मंजूषा कला बिहार के अंग क्षेत्र की एक विशेष लोक कला के रूप में देश -विदेश में अपनी पहचान बना रही है। मॉरीशस में आयोजित बिहार महोत्सव 2017 में इस कला को भागलपुर केेे कई कलाकारों ने प्रस्तुत किया था। डीएम श्री घोष ने पेंटिंग और मूर्ति कला से जुड़े स्थानीय कलाकारों और प्रशिक्षकों को मंजूषा कला की ओर अपना ध्यान देने का आग्रह किया ताकि आने वाली पीढ़ी को भी बिहार की विभिन्न कलाओं से अवगत कराया जा सके और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रखा जा सके। हिन्दुस्थान समाचार/ अजिताभ /विभाकर-hindusthansamachar.in