भारत-नेपाल अक्षय ऊर्जा व्यापार से होगा क्षेत्रीय विकास
भारत-नेपाल अक्षय ऊर्जा व्यापार से होगा क्षेत्रीय विकास
बिहार

भारत-नेपाल अक्षय ऊर्जा व्यापार से होगा क्षेत्रीय विकास

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सीड और एशिया फाउंडेशन द्वारा भारत-नेपाल सब-नेशनल एनर्जी ट्रेड विषय पर वेबिनार का आयोजन पटना, 31 जुलाई (हि.स.)। सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) और द एशिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में शुक्रवार को भारत और नेपाल के बीच सबनेशनल एनर्जी ट्रेड विषय पर एक वेबिनार का आयोजन किया गया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच अक्षय ऊर्जा आधारित व्यापर और विनिमय को बढ़ावा देना था, जिसमें बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे सीमावर्ती राज्यों की प्रमुख भूमिका होगी। रिन्यूएबल एनर्जी, सीड के हेड अश्विनी अशोक ने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों के स्तर पर नेपाल के साथ सब-नेशनल एनर्जी ट्रेड का मुख्य आधार यह है कि नेपाल मुख्य रूप से हाइड्रो पावर के मामले में धनी राष्ट्र है और यूपी-बिहार सौर ऊर्जा के मामले में अग्रणी हैं। सब-नेशनल एनर्जी ट्रेड को गति देने के मामले में दोनों ओर मौसम संबंधी कारक है, जैसे मानसून के सीजन में बिहार और यूपी में सोलर उत्पादन कम होता है, वहीँ खूब बारिश के हालात में नेपाल में हाइड्रो पावर का खूब उत्पादन होता है और इससे पैदा ऊर्जा का आयात किया जा सकता है। वहीँ दूसरी ओर पीक गर्मी के सीजन में सोलर का ज्यादा उत्पादन होता है और ऐसे समय में बिहार-यूपी राज्य से सोलर ऊर्जा को नेपाल को निर्यात कर वहां ऊर्जा की कमी को पाटा जा सकता है। एरिया कन्वेनर इराडे डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि भारत और नेपाल में ऊर्जा और इसके उत्पादन स्रोतों की स्थिति बहुत अलग है। नेपाल में ऊर्जा उत्पादन की संभावनाएं बहुत अधिक है, लेकिन वहां मांग कम है। भारत और नेपाल दोनों को एक दूसरे की जरुरत है, क्योंकि नेपाल के पास आने वाले समय में उपयोग से ज्यादा बिजली होगी तो वहीँ भारत में मांग और बढ़ेगी। ऐसे में नेपाल भारत को बिजली बेच सकता है। भारत और नेपाल एनर्जी ट्रेड के लिए ओपन एक्सेस, पावर पूल और मार्किट बेस्ड इलेक्ट्रिसिटी डिस्पैच से रास्ता काफी आसान होगा, जिसे सब-नेशनल एनर्जी ट्रेड से गति मिलेगी। पत्रकार चंद्रकिशोर झा ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। दोनों के बीच जन-जन का संबंध है। अब समय आ गया है कि हम जन-जन के साथ ‘जन-जल' का संबंध बनाये। बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन में रिन्यूएबल एनर्जी कमिटी के पूर्व अध्यक्ष सुबोध सिन्हा ने कहा कि हाल में कुछ मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद उभरे है, ऐसे में संबंधों में सुधार बिज़नेस और एनर्जी ट्रेड के लिहाज से जरूरी है, साथ ही निवेशकों को समुचित माहौल देने की जरूरत है। ओपन सिस्टम और बेहतर फाइनेसिंग से इस काफी बढ़ावा मिलेगा। एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट के अर्थशास्त्री डॉ. अभिजीत घोष ने कहा कि नेपाल अपने कुल अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का 66 फीसदी व्यापार भारत के साथ करता हैं। दोनों देशों के बीच ट्रेड एंड ट्रांजिट पॉइंट पर जरूरत से ज्यादा अधिक समय लगता है। इसी तरह दोनों के बीच वाटर मैनेजमेंट के मुद्दे को भी सुलझाने की जरूरत है। ऐसी कई समस्याओं को दूर कर व्यापार को और बढ़ाया जा सकता है। वेबिनार का संचालन अरविंद कुमार ठाकुर, प्रोग्राम डायरेक्टर-सीड ने किया। परिचर्चा में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र से जुड़े संगठनों, इंडस्ट्रीज, थिंक टैंक, पटना यूनिवर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी, बिहार, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी सहित कई संस्थाओं और एनर्जी कलेक्टिव और मदर्स नेटवर्क से जुड़े 60 से अधिक लोगों ने भाग लिया। हिन्दुस्थान समाचार/राजीव/विभाकर-hindusthansamachar.in