बोचहां विधायक बेबी कुमारी भी हुईं  बेटिकट
बोचहां विधायक बेबी कुमारी भी हुईं बेटिकट
बिहार

बोचहां विधायक बेबी कुमारी भी हुईं बेटिकट

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बोचहां सीट गई वीआईपी के कोटे में, मुसाफिर पासवान को मिला सिम्बल बेबी ने कहा, उनके साथ धोखा हुआ है, निर्दलीय ही उतरेंगी बोचहां के मैदान में पटना, 15 अक्टूबर (हि.स.) । एनडीए में जैसे-जैसे सीटों का बंटवारा फाइनल हो रहा है, वैसे-वैसे बगावती नेताओं के सुर भी तेज हो रहे हैं। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेंद्र सिंह के बगावत के बाद एक और प्रदेश उपाध्यक्ष बेबी कुमारी ने अपने बगावती तेवर अख्तियार कर लिए हैं। बेबी कुमारी ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि उनके साथ धोखा हुआ है। पार्टी ने उनके साथ वादा किया था कि उनको इस बार विधानसभा चुनाव में अपने सिंबल पर चुनाव लड़ाएगी, लेकिन ऐन मौके पर यह सीट वीआईपी को दे दी गई। उसके बाद उन्हें बताया गया कि वह वीआईपी के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगी। लेकिन वीआईपी ने बोचहां से बेबी कुमारी की जगह मुसाफिर पासवान को पार्टी सिम्बल दे दिया। अब बेबी कुमारी बोचहां से एक बार फिर चुनाव मैदान उतरने का एलान कर दिया है। बोचहां विधायक बेबी कुमारी ने कहा कि उन्होंने वीआईपी के सिंबल पर चुनाव लड़ने की तैयारी भी शुरू कर दी लेकिन ऐन मौके पर उन्हें एक बार फिर से धोखा मिला। वीआईपी सुप्रीमो मुकेश सहनी ने उनका टिकट काट दिया और अपने उम्मीदवार मुसाफिर पासवान को सिंबल दे दिया। बेबी कुमारी ने साफ कहा कि वह इस बार भी चुनाव लड़ेंगी और जीतेंगी। हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगी या फिर एक बार निर्दलीय चुनाव में उतरेंगी। भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष और विधायक बेबी कुमारी ने कहा कि वह पिछली बार भी निर्दलीय चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची थी। वह भी हजार, दो हजार वोट से नहीं, पूरे 25 हजार वोटों से चुनाव जीती थी। फिर उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर लिया। भाजपा ने उनका मान बढ़ाते हुए पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया। बेबी कुमारी के मुताबिक भाजपा आलाकमान ने उनसे वादा किया था कि उनको किसी भी हालत में बोचहां से भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़ाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बेबी कुमारी मुकेश सहनी पर आरोप लगाते हुए कहती हैं कि मुकेश सहनी ने उन्हें इस बात से टिकट देने से इन्कार कर दिया कि उनकी जाति का वोट महज 28 सौ है। बेबी कुमारी कहती हैं कि वह जाति की राजनीति ही नहीं करती। वह लगातार क्षेत्र में रहती हैं और यदि वह जाति की राजनीति करती तो फिर 25000 वोट से कैसे जीतती? हिन्दुस्थान समाचार/राजीव रंजन/विभाकर-hindusthansamachar.in