बिहार विधानसभा चुनाव : चर्चा में हैं सीबीआई कांड की आरोपी पूर्व मंत्री मंजू वर्मा
बिहार विधानसभा चुनाव : चर्चा में हैं सीबीआई कांड की आरोपी पूर्व मंत्री मंजू वर्मा
बिहार

बिहार विधानसभा चुनाव : चर्चा में हैं सीबीआई कांड की आरोपी पूर्व मंत्री मंजू वर्मा

news

बेगूसराय, 16 सितम्बर (हि.स.)। आगामी विधानसभा चुनाव में बेगूसराय की सभी सातों सीटों पर किस विधायक का टिकट कटेगा, किसका बचेगा इसको लेकर गहमगहमी उफान पर है। टिकट कटने और बचने को लेकर सबसे अधिक उफापोह की स्थिति चेरिया बरियारपुर, तेघड़ा और बखरी (सुरक्षित) सीट पर बनी हुई है। तेघड़ा के वर्तमान विधायक चुनाव नजदीक आते ही राजद छोड़कर जदयू में शामिल हो गए हैं। पांच साल तक अपने क्षेत्र से गायब रहने वाले विधायक वीरेंद्र कुमार पिछले पांच दिनों से क्षेत्र में बहुत एक्टिव हैं। उद्घाटन-शिलान्यास भी कर रहे हैं। इस दौरान उन्हें कई जगह विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। उनके जदयू में आने के बाद एनडीए में हड़कंप मचा हुआ है। भाजपा के पूर्व विधायक ललन कुंवर, राम लखन सिंह, केशव शांडिल्य और सुनील कुमार टिकट के प्रबल दावेदार हैं। लेकिन अभी कहना मुश्किल है कि यह सीट जदयू के खाते में जाएगी। अगर सीट जदयू के खाते में गई तो भूमिपाल राय को भी टिकट मिलने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। पूर्व विधान पार्षद रह चुके भूमिपाल राय अभी जदयू के जिलाध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी हैं। बेगूसराय की राजनीति ही नहीं समाज नीति में भी इनकी बेहतरीन पकड़ है। बात करें बखरी की तो यहां से राजद विधायक उपेंद्र पासवान का टिकट कटवाने में उन्हीं की पार्टी के कई प्रमुख कार्यकर्ता आलाकमान तक पहुंच चुके हैं। बैठक कर भी विरोध जताया जा रहा है। महागठबंधन में शामिल हुई सीपीआई हर हालत में यह सीट अपने हिस्से के कोटे में लाना चाहती है। इन दोनों सीटों के अलावा चेरिया बरियारपुर विधानसभा सीट भी बहुत चर्चा में है। चेरिया बरियारपुर के जद यू विधायक कुमारी मंजू वर्मा का टिकट आगामी विधानसभा चुनाव में कटेगा या बचेगा, यह क्षेत्र में चर्चा का विषय है। कुमारी मंजू वर्मा वहीं हैं जिन्हें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दो वर्ष पूर्व हुए बहुचर्चित मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड में नाम आने के बाद मंत्रिमंडल से हटा दिया था। उससे जुड़े मामले सीबीआई देख रही है। उस मामले में पति के साथ जेल भी जाना पड़ा, पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। पिछले वर्ष दोनों पति-पत्नी जमानत पर रिहा हुए और चुनाव की आहट के साथ ही वे विभिन्न क्षेत्रों में घूम रही हैं, विरोध झेल रही हैं। पहली बार 2010 के चुनाव में और 2015 में जीतने पर राज्य मंत्रिमंडल में समाज कल्याण विभाग का मंत्री बनाया गया। 2018 में मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह कांड में पति का नाम आने और सीबीआई जांच के क्रम में घर से सेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले हथियारों की 50 गोली मिलने पर सीबीआई ने मामला दर्ज किया और फिर दोनों पति-पत्नी जेल की यात्रा कर आए। चर्चा है कि सुशासन की बात करने वाले नीतीश कुमार इनका टिकट काटकर किसी दूसरे को उतारने का मन बना रहे हैं। ऐसे कुमारी मंजू वर्मा के टिकट कटवाने की होड़ में जदयू के कुशवाहा जाति के कई स्थानीय दावेदार लग चुके हैं। कुल मिलाकर ये तीनों विधानसभा क्षेत्र अभी बेगूसराय की राजनीति में सबसेेे अधिक चर्चा का विषय बना हुए हैं। हिन्दुस्थान समाचार/सुरेन्द्र/बच्चन-hindusthansamachar.in