बाढ़ अनुमंडल को जिला नही बनना बना चुनावी मुददा
बाढ़ अनुमंडल को जिला नही बनना बना चुनावी मुददा
बिहार

बाढ़ अनुमंडल को जिला नही बनना बना चुनावी मुददा

news

बाढ़,18अक्टूबर(हि.स.)।एनडीए को छोड़कर अन्य सभी दलीय एवं निर्दलीय प्रत्याशियों ने 138 वर्ष पुराने "बाढ़ अनुमंडल" को जिला नही बनाये जाने को ही अपना चुनावी मुददा बनाकर लोगों के बींच अपना-अपना जनसंपर्क चला रहे हैं।राजनैतिक रूप से राष्ट्रीय क्षितिज पर वर्षों पूर्व से सर्वाधिक चर्चित प्राचीन "बाढ़ अनुमंडल" को जिला बनाये जाने के नाम पर 1972 से बाढ़ अनुमंडल के लोगों को ठगा गया है और जब-जब लोकसभा या विधानसभा का चुनाव आता है तो हर राजनैतिक दलों के नेताओं द्वारा वोट लेने के लिये "बाढ़" को जिला बनाये जाने का अब तक सिर्फ कोरा आश्वासन दिया गया है।दुःखद है कि जब झारखण्ड भी बिहार राज्य में था तो तब उन दिनों में भी कई नये जिले बनाये गये,पर "बाढ़" को जिला नही बनाया गया।अतिसंवेदनशील की श्रेणी में रहा "बाढ़ अनुमंडल" को जिला बनाये जाने की मांग को लेकर न्यायालय के अधिवक्ता संघ के अलावा कई राजनैतिक व सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा कई बार आंदोलन किया गया है।इतना ही नही 1990 के बाद लोकनायक जयप्रकाश नारायण के छात्र आंदोलन के सहयोगी रहे राजनीतिज्ञों में जब जनता दल की लालू प्रसाद की सरकार बनीं तो "बाढ़ अनुमंडल" के लोगों में उम्मीद जगी की अब "बाढ़" जिला जरूर बनेगा,पर लोगों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। जयप्रकाश नारायण के छात्र आंदोलन से लोगों के बींच अपना पहचान बनाने बाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं पूर्व मंत्री विजयकृष्ण ने "बाढ़" को जिला बनाये जाने को लेकर हर मंचों से मुखर होकर बोलते रहे हैं और "बाढ़" को जिला बनाये जाने के नाम पर गंभीर राजनीति करते रहे हैं।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब 1985 में हरनौत से लोकदल के विधायक बने थे,तब "फतुहा-बाढ़-बड़हिया टाल संघर्ष समिति के बैनर तले तत्कालीन काग्रेस सरकार के खिलाफ आंदोलनरत थे।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब 1989 में बाढ़ लोकसभा से चुनाव लड़ने के क्रम में भी बाढ़ को जिला बनाये जाने का आश्वासन खुले चुनावी मंच से दिया था और मुख्यमंत्री श्रीकुमार बाढ़ लोकसभा से लगातार सांसद बनकर केंद्र में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री भी रहे और मुख्यमंत्री श्रीकुमार ने खुले मंच से कहा था कि बिहार में जब मेरी सरकार बनीं तो विधान सभा की पहली कैबिनेट की बैठक में ही "बाढ़" को जिला बनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया जायेगा।बिहार में 1990 में जब जनतादल की लालू प्रसाद के नेतृत्व में सरकार बनीं तो बाढ़ अनुमंडल के लोगों को विश्वास था कि अब "बाढ़" जिला बनेगा और "बाढ़" को जिला बनाया भी गया और महज 11 दिन बाद ही राजनैतिक साजिश के तहत "बाढ़" के जिला के ताज को उतार दिया गया और बाढ़ जिला की अधिसूचना को निलंबित कर दिया गया।राज्य का 138 वर्ष पुराने बाढ़ अनुमंडल अपने आगोश में तीन विधान सभा क्षेत्र एवं छह प्रखंडों को समेटे रहने के बाबजूद भी इस क्षेत्र के लोगों द्वारा करीब पांच दशकों से बाढ़ को जिला बनाये जाने की मांग को आवाज बुलंद करने के साथ ही आंदोलन की जा रही है फिर भी अब तक राज्य की सत्तासीन राजनेताओं के कानों पर जूं तक नही रेंगी है। हिन्दुस्थान समाचार/सत्यनारायन/चंदा-hindusthansamachar.in