बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है संस्कृत उच्च विद्यालय
बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है संस्कृत उच्च विद्यालय
बिहार

बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है संस्कृत उच्च विद्यालय

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बिहारशरीफ, 31 जुलाई(हि. स.)। नालंदा जिले का सबसे पुराना विश्वबंधु संस्कृत उच्च विद्यालय, तेल्हाड़ा अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। आठ कमरों से सुसज्जित दो मंजिला इमारत अब ढह चुकी है। विद्यालय में मात्र एक कमरा ही बचा है जिसमें शिक्षकों का कार्यालय एवं दसवीं की कक्षा चलती है।विद्यालय का अपना बड़ा खेल मैदान है, जिसके चारों तरफ अतिक्रमणकारियों का कब्जा हो चुका है।किसी समय छात्रा-छात्राओं से गुलजार रहने वाला यह विद्यालय आज भूतबंगले में तब्दील हो चुका है, जिसकी खोज खबर लेेेने वाला कोई नहीं है। इस विद्यालय में पहले जहां संस्कृत के विद्वान पंडित और आचार्य पदस्थापित थे। यहां वेद, उपनिषद, ज्योतिष, साहित्य, भाषा , विज्ञान के अलावा रामचरितमानस आदि का पाठ पढ़ाया जाता था। इस विद्यालय में आधा दर्जन शिक्षक, लिपिक एवं एक आदेशपाल की भी नियुक्ति है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक प्रबोध कुमार प्रवीण ने बताया कि विद्यालय के सभी कमरे ध्वस्त हो चुके हैं और विद्यालय की जमीन पर दबंग अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर लिया है। विद्यालय भवन नहीं रहने से छात्रा-छात्राओं की पढ़ाई में काफी कठिनाई हो रही है।उन्होंने बताया कि एक दशक पूर्व तक इस विद्यालय में हॉस्टल की भी व्यवस्था थी, जिसमें रहकर सैकड़ों छात्र अध्ययन करते थे। उन्होंने बताया कि इस संबंध में जिला प्रशासन, बिहार सरकार, शिक्षा विभाग एवं अन्य जनप्रतिनिध्यिों को लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की गुहार लगायी है, लेकिन प्रतिफल अभी तक शून्य ही है। हिन्दुस्थान समाचार/प्रमोद पाण्डेय/विभाकर-hindusthansamachar.in