बक्सर केन्द्रीय कारा का  भयावह वर्तमान  और भविष्य दिशाहीन  राह पर
बक्सर केन्द्रीय कारा का भयावह वर्तमान और भविष्य दिशाहीन राह पर
बिहार

बक्सर केन्द्रीय कारा का भयावह वर्तमान और भविष्य दिशाहीन राह पर

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बक्सर ,10 सितम्बर (हि .स.) अंग्रेजोंं ने गंगा ,ठोरा और कर्मनाशा नदियों के संगम स्थल पर 10 सितंबर 1861 को तीन वर्ग किलोमीटर के दायरे में किलानुमा बंदीगृह का निर्माण करवाया गया था । यह जेल गुलाम भारत में गुलामी और बर्बता की टीस आज भी अपने गर्भ में समेटे हुए है । 150 वर्षोंं से भी अधिक के इतिहास को समेटे हुए इस जेल में कई अनाम स्वतंत्रता सेनानियों सहित जय प्रकाश नारायण बंद रहे ।इनके अलावा आजादी के बाद चारु मुजुमदार ,जार्ज फर्नान्डिस ,राहुल सांकृत्यायन सहित सूबे के वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी यहां कैद थे। राहुल सांकृत्यायन की "रुपहले सच "अप्रकाशित पुस्तक के कुछ भाग हाल के दिनों तक केन्द्रीय कारा में मौजूद थे ।अपने बंदी काल के दौरान राहुल जी ने इसे लिखा था ।केन्द्रीय करा के अन्दर घुसते ही गुलाम भारत में अंग्रेजोंं के जुल्मो सितम के लिखित वृतांत अब भी एक स्तम्भ के रूप में है जो आजादी के दीवानो के नाम पर बनाया गया है । इस केन्द्रीय कारा की भगौलिक बनावट रमणीक है ।सुरक्षा की दृष्टि से तीन नदियों से यह घिरा है ।इसके अलावा इस केन्द्रीय कारा के अन्दर तालाब ,बगीचा ,खेत ,मैदान ,पुस्तकालय ,व्यायामशाला ,पैंंतीस शय्या वाला अस्पताल और दो फैक्ट्री भी हैंं ।चौदह सौ कैदियों की क्षमतावहन करने वाली इस जेल को देश की अनूठी जेल में शुमार किया जाता है ।देश की यह इकलौती जेल है जहांं फ़ांंसी के लिए रस्सी तैयार की जाती है ।फ़ांंसी की सजा देश के किसी भी न्यायालय के किसी भी जेल के कैदी को मिलती है तो फ़ासी की रस्सी बक्सर केन्द्रीय कारा के कुशल व प्रशिक्षित बंदियों द्वारा ही तैयार की जाती है । पहले मनीला (विदेश ) से एक विशेष किस्म की कपास का आयात कर रस्सी बनाये जाने से इसे मनीला रस्सी का नाम दिया गया था ।पर अधिकारियों के अनुसार अब यह विशेष किस्म की कपास बी -34 को पंजाब के किसान उगा रहे हैंं । वर्तमान में कई सफेदपोश ,अधिकारी ,क्रूर बलात्कारी और दुर्दांत अपराधी इस कारा में बंद हैंं लेकिन केन्द्रीय कारा की दरकती दीवारेंं और ढहते वार्ड कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैंं। हालांकि हाल के दिनों में जेल की जर्जर स्थिति को देखते हुए राज्य कारा प्रशासन ने इसकी मरम्मत के लिए राशि का आवंटन भी कर दिया है पर जिला भवन निर्माण विभाग की सुस्ती की वजह से अभी भी यह काम अधर में है । यह जेल अपने गर्भ में इतिहास ,भूगोल ,कानून व्यवस्था सबको समेटे कभी अपनी बदहाली पर रोती है तो कभी आत्म गौरव की श्लाघा से घिरा रहता है । इसके अतीत को वर्तमान पीढ़ी के लिए सहेजने की जरुरत है ।इसलिए जेल के प्रशासकीय भवन को अब जेल संग्रहालय बनाया जाए ताकि नयी पीढ़ी को ज्ञात हो सके कि इसका क्या ऐतिहासिक महत्व है। यही नही बक्सर देश का इकलौता जिला है ,जहांं केन्द्रीय करा समेत ,महिला बंदियों के लिए अलग जेल और मुक्त कारा की परिकल्पना सफल रही है | हिन्दुस्थान समाचार /अजय मिश्रा /विभाकर-hindusthansamachar.in