प्रेम कुमार थे उप मुख्यमंत्री पद के दावेदार, नेता विधायक दल भी नहीं बनें
प्रेम कुमार थे उप मुख्यमंत्री पद के दावेदार, नेता विधायक दल भी नहीं बनें
बिहार

प्रेम कुमार थे उप मुख्यमंत्री पद के दावेदार, नेता विधायक दल भी नहीं बनें

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गया, 15 नवम्बर (हि.स.)। डॉ.प्रेम कुमार गया शहरी विधानसभा चुनाव क्षेत्र से लगातार आठ बार विधायक निर्वाचित हो चूके हैं। समर्थकों को उम्मीद थी कि इस बार पार्टी आलाकमान प्रेम कुमार को उप मुख्यमंत्री बनाने जा रहा है। वहीं, पार्टी आलाकमान ने उप मुख्यमंत्री तो दूर पार्टी विधायक दल का नेता भी नहीं बनाया। इससे जहां समर्थकों में घोर निराशा हैं। वहीं,प्रेम कुमार के विरोधियों का कहना है कि प्रेम कुमार का अतित कहीं न कहीं इसके लिए जिम्मेदार है।जब प्रेम कुमार ने अपने पहले विधायक के कार्यकाल में नब्बे के दशक में तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सह नेता विधायक दल इंद्र सिंह नामधारी के साथ भाजपा विधायक दल को तोड़ते हुए लालू प्रसाद यादव की सरकार को बचाने में अहम भूमिका निभाई थी। भाजपा विधायक दल की टूट संबंधित श्री नामधारी के पत्र में प्रेम कुमार का हस्ताक्षर 13 वें नंबर पर था। भाजपा के सफर में प्रेम कुमार की छवि अति पिछड़ा वर्ग के एक बड़े राजनेता के रूप में हुई है।प्रेम कुमार समय के अनुकूल अपनी प्रतिबद्धता बदलने में माहिर हैं।1974 छात्र आंदोलन में तबके सर्वमान्य छात्र नेता अखौरी निरंजन प्रसाद ने प्रेम कुमार को राजनीति के साथ-साथ आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मदद की।1990 में पार्टी सिम्बल प्रेम कुमार को कैसे मिला? इसे लेकर हर चुनाव में प्रेम कुमार और अखौरी निरंजन प्रसाद की चर्चा भाजपा के राजनीतिक गलियारों में खूब होता है। पार्टी में सुशील कुमार मोदी के उत्थान के बाद प्रेम कुमार की प्रतिबद्धता सुशील कुमार मोदी के खास सिपहसालाकारों में शुरू हुआ। लेकिन प्रेम कुमार राजनीतिक महत्वाकांक्षा को लेकर सुशील कुमार मोदी से दूरी बनाने में देर नहीं की। समर्थक प्रेम कुमार को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने में पीछे नहीं रहे। लेकिन रविवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में भाजपा विधायक दल का नेता कटिहार के ताराकिशोर प्रसाद के नाम की घोषणा हो गई। साथ ही उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी होंगे। प्रेम कुमार सोमवार को मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।इस बात की पूरी संभावना है। लेकिन पार्टी आलाकमान ने प्रेम कुमार के राजनीतिक उड़ान पर ब्रेक लगा दिया।इस बार प्रेम कुमार चुनाव जीतने में एक बार फिर सफल हो गए। लेकिन गया के शहरी विधानसभा चुनाव में पहली बार कोई तीन दशक बाद प्रतिद्वंद्वी को 50 हजार से ऊपर मत मिला।जो प्रेम कुमार के खिलाफ गया के आम आदमी का रोष था। हिन्दुस्थान समाचार/पंकज कुमार-hindusthansamachar.in