बिहार

प्यास लगने पर कुआं खोदने की कहावत चरितार्थ कर रहा स्वाथ्य महकमा

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बक्सर, 24 जुलाई (हि.स.)। प्यास लगी तो कुआं खोदने पर आमादा है बक्सर जिले का स्वास्थ्य महकमा। बक्सर स्वास्थ्य महकमे को एक माह के लिए एक अदद टेक्नीशियन की तलाश है जो कोरोना जांच के लिए टू-नेट मशीन से जांच कर सके। इस बाबत जिला स्वास्थ्य समिति ने 22 जुलाई को अपने पत्रांक 747 के तहत जारी नोटिस के माध्यम से अल्पकालीन अवधि (एक माह) के लिए टेक्नीशियन की बहाली प्रक्रिया शुरू की है जिसके लिए साक्षात्कार तिथि 30 जुलाई और सेवा अवधि जारी वर्ष के 31 अगस्त तक के लिए होगी। वह भी बारह हजार रुपये के मानदेय पर। आश्चर्य तो यह है कि केन्द्रीय स्वाथ्य राज्य मंत्री अश्विनी चौबे के संसदीय क्षेत्र में यह सब हो रहा है। बताते चलें कि सदर अस्पताल बक्सर में ट्रू-नेट मशीन लगे दो माह से भी अधिक का समय हो गया है। दावा तो यह था कि उस मशीन से प्रति दिन चालीस कोरोना मरीजों की जांच की जायेगी पर दावा करते समय स्वास्थ्य महकमा यह भूल गया कि बगैर टेक्नीशियन जांच सम्भव नहीं है। इधर जिले में कोरोना की तेज रफ्तार ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। कोरोना रोगियों के आंकड़े पांच सौ के पार कर गये हैं। जिले के सभी 11 प्रखंडों को कोरोना ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। जिलाधिकारी अमन समीर आये दिन फरमान दर फरमान जारी कर रहे हैं, पर वास्तविकता की धरातल पर फरमान बेअसर सावित हो रहे हैं। जिला प्रशासन के इस रवैये पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए विपक्षी दलों के ओम प्रकाश सिंह (माले) विनीत कुमार (आरजेडी) समेत भाजपा नेता इंदु भूषण तिवारी ने कोरोना महामारी के इस दौर में आमलोगों के प्रति जिला स्वास्थ्य महकमा लापरवाह बना बैठा है। इन नेताओं ने कहा है कि एक तरफ बिहार दौरे पर आई केन्द्रीय टीम बिहार सरकार को कोरोना जांच में तेजी लाने की नसीहत दे गई है, वही जांच के लिए टू-नेट मशीन तो है पर जांच नहीं हो सकती। जिले के स्वास्थ्य महकमे का यह रवैया पूरी तरह समझ से परे हे। हद तो यह है कि सरकार से लेकर आम लोगों ने यह जान रखा है कि कोरोना महामारी अब हमारे साथ ही रहेगी। जबतक विश्व का कोई भी भी देश कोरोना के टीका का सफल इजाद के बाद मानव पर सफल परीक्षण नहीं करलेता है तबतक कोरोना वायरसस जाने वाला नहीं। ऐसे में हालात बदतर ही नहीं बेकाबू होने की स्थिति में है। जिला अधिकारी अमन समीर की मानें तो कोरोना की जांच अब प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर भी की जायेगी। पर कैसे इसका जबाब फिलहाल प्रशासन के पास भी नहीं है। खुद सिविल सर्जन जितेंद्रनाथ का कहना है कि सदर अस्पताल में लगी टू -नेट मशीन से तो जांच स्थानीय टेक्नीशियन के माध्यम से शुरू की गई थी। पर रिपोर्ट के यकीन को लेकर असमंजस बना हुआ था। जहां पीड़ित लोगों की रिपोर्ट निगेटिव आती थी तो हम मान लेते थे पर पॉजिटिव आने पर पुनः कन्फर्म होने के लिए रिपोर्ट को पटना भेजा जाता था। हिन्दुस्थान समाचार /अजय मिश्रा/हिमांशु शेखर /विभाकर-hindusthansamachar.in