पर्यावरण संरक्षण भारत के लिए बड़ी समस्या
पर्यावरण संरक्षण भारत के लिए बड़ी समस्या
बिहार

पर्यावरण संरक्षण भारत के लिए बड़ी समस्या

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गया, 15 अक्टूबर (हि.स.) दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) ने संविधान दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित पांच दिवसीय वेबिनार के तीसरे दिन गुरुवार को पर्यावरण संरक्षण एवं जीवों के प्रति करुणा विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान में मुख्य वक्ताओं एवं प्रतिभागियों ने पर्यावरण एवं जीव संरक्षण से जुड़े अहम मुद्दों कर विचारों का आदान - प्रदान किया गया । वर्ष 2019 से मनाए जा रहे वार्षिक 'संविधान दिवस' समारोह के साहचर्य राज्य संयोजक विश्वविद्यालय के रूप में सीयूएसबी ने इस व्याख्यान के लिए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) दिल्ली के प्रोफेसर भारती को आमंत्रित किया था। प्रोफेसर भारती ने "पर्यावरण संरक्षण एवं जीवों के प्रति करुणा" विषय पर अपना व्याख्यान दिया। प्रो भारती ने विषय पर कुछ विशेष जानकारी साझा करते हुए कहा कि आज पर्यावरण संरक्षण भारत के लिए एक समस्या बन चुका है।उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार पर्यावरण की सुरक्षा के लिए हमारे दायित्व से अधिक महत्वपूर्ण नहीं है। प्रो.भारती ने गांधी और तिलक के शब्दों के माध्यम से भी बताया कि हमें हमेशा कर्तव्य के बाद अधिकार की बात करनी चाहिए। उन्होंने कुछ ऐतिहासिक मामलों के फैसले को भी वेबिनार में जुड़े प्रतिभागियों से साझा किया जिसमें पर्यावरण की सुरक्षा के बारे में अदालत ने अतीत में फैसले दिए हैं। दूसरे वक्ता के रूप में जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के डा. असद मलिक ने "संवैधानिक विचार और राष्ट्रीय गान के सम्मान" शीर्षक पर अपने विचार रखे। डॉ असद मलिक ने अपनी बात की शुरुआत में बताया कि हमें मौलिक शब्द को न केवल अधिकार के साथ देखना है, बल्कि कर्तव्यों के महत्व के साथ भी देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि क्यों संवैधानिक आदर्शों का सम्मान करना हमारा दायित्व है। डॉ असद मलिक ने स्वर्गीय राहत इंदौरी के एक शेर के माध्यम से अपनी बातों को समझाते हुए कहा कि "आप की नज़रों में सूरज की है जितनी अज़्मत, हम चराग़ों का भी उतना ही अदब करते हैं ।" उन्होंने अपने व्याख्यान में न्यायालय के राष्ट्रीय गान, राष्ट्रीय गीत आदि से संबंधित कुछ ऐतिहासिक मामलों के फैसले को साझा किया। वेबिनार में सीयूएसबी के पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर प्रधान पार्थसारथी ने पर्यावरण क्षेत्र से जुड़े अपने अनुभव को साझा किया और बताया कि कैसे दिन-प्रतिदिन हम अपने प्राकृतिक संसाधनों का गलत रूप में प्रयोग कर रहे हैं, इसलिए अब हमें पर्यावरण की रक्षा करना अतिआवश्यक है।वेबिनार में कार्यक्रम के नोडल अधिकारी प्रोफेसर संजय श्रीवास्तव (प्राध्यापक, विधि विभाग, सीयूएसबी) के साथ - साथ, विवि के अन्य विभागों के प्राध्यापकों ने भी अपने विचार व्यक्त किए। हिन्दुस्थान समाचार/पंकज कुमार/विभाकर-hindusthansamachar.in