पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत का कोरोना से निधन
पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत का कोरोना से निधन
बिहार

पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत का कोरोना से निधन

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पांच दिनों में कोरोना ने ली बिहार के दो मंत्रियों की जान मुख्यमंत्री ने जताया शोक, कहा जमीन से जुड़े नेता थे कामत पटना, 16 अक्टूबर (हि.स.) । बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री कपिलदेव कामत नहीं रहे। गुरुवार और शुक्रवार की दरम्यानी रात उनकी मौत हो गई। उन्हें कोरोना हुआ था। वे हफ्ते भर से पटना एम्स में भर्ती थे। उन्हें पहले से ही किडनी की समस्या थी। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था। गुरुवार को उनका ब्लड प्रेशर कम हो गया था। कामत की हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाये हुए थे। एक दिन के अंतराल पर उनका डायलिसिस किया जा रहा था। बीच में उनकी हालत स्थिर हो गई थी, लेकिन बाद में बिगड़ने लगी थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कपिलदेव कामत के निधन पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि कपिलदेव कामत जमीन से जुड़े नेता थे। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा। गौरतलब है कि कोरोना की चपेट में आकर पिछले पांच दिनों में बिहार सरकार के दूसरे मंत्री की मौत कोरोना से हुई है। इससे पहले भाजपा नेता और पिछड़ा व अति पिछड़ा कल्याण मंत्री विनोद सिंह की मौत हो गई थी। विनोद सिंह कोरोना संक्रमित हुए थे। वह कोरोना से स्वस्थ हो गए थे, लेकिन बाद में उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया। कपिलदेव कामत जदयू के कद्दावर नेता थे। वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेहद करीबी माने जाते थे। मधुबनी के बाबूबरही से विधायक रहे कामत नीतीश कैबिनेट में पंचायती राज मंत्री थे। उनके स्वास्थ्य को देखते हुए पार्टी ने इस बार उनकी जगह उनकी बहू मीना कामत को बाबूबरही से अपना प्रत्याशी बनाया था। बहुत व्यवहार कुशल और मृदुभाषी कामत ने मैट्रिक तक की ही शिक्षा प्राप्त की थी। कामत की सक्रिय राजनीतिक वर्ष 1980 के बाद शुरू हुई थी। 1980 के विधानसभा चुनाव में बाबूबरही विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी महेन्द्र नारायण झा के पक्ष में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। हालांकि विभिन्न कारणों से इनका संबंध विधायक महेन्द्र नारायण झा से खराब हो गया। तनातनी में कामत 1985 के विधानसभा चुनाव में बाबूबरही विधानसभा से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़े हो गए थे। वे चुनाव हार गये थे। इसके बाद कांग्रेस विधायक गुणानन्द झा के साथ राजनीति शुरू की। आगे इन्होंने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र के जन कांग्रेस के संयोजक बन गए। हिन्दुस्थान समाचार/राजीव रंजन/विभाकर-hindusthansamachar.in