निर्वाचन प्रक्रिया में निर्वाची पदाधिकारी की भूमिका सर्वोपरि होती है : डीएम
निर्वाचन प्रक्रिया में निर्वाची पदाधिकारी की भूमिका सर्वोपरि होती है : डीएम
बिहार

निर्वाचन प्रक्रिया में निर्वाची पदाधिकारी की भूमिका सर्वोपरि होती है : डीएम

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सहरसा,15 सितम्बर(हि.स.)। निर्वाचन प्रक्रिया में निर्वाची पदाधिकारी की भूमिका संबंधित विधान सभा क्षेत्र के लिए सर्वोपरि होती है। भारत निर्वाचन आयोग के दिशा निर्देष के तहत वे अपने कर्तव्य एवं दायित्वों का निर्वहन करते हैं। उनके कार्यां में किसी का हस्तक्षेप नहीं होता है। नाम निर्देशन की प्रक्रिया किसी भी चुनाव में मुख्य कार्य होते हैं उसके बाद हीं अन्य प्रक्रिया आरंभ होती है। भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश के आलोक में पारदर्शी, स्वच्छ एवं पक्षपात रहित रूप में अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों का निर्वहन करें। जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी कौशल कुमार ने मंगलवार को आगामी बिहार विधान सभा आम निर्वाचन-2020 के संदर्भ में सहरसा जिलान्तर्गत सभी चार विधान सभा क्षेत्रों के निर्वाची पदाधिकारी, सहायक निर्वाची पदाधिकारी एवं नाम निर्देशन कोषांग के कर्मियों के लिए आयोजित प्रशिक्षण सह कार्यशाला में उन्हें संबोधित किये। जिलाधिकारी ने कहा कि निर्वाची पदाधिकारियों के निर्वाचन कार्य के दो चरण है। पहला अधिसूचना जारी होने के पश्चात नाम निर्देशन की प्रक्रिया तथा दूसरा चरण मतदान एवं मतगणना का कार्य संपन्न कराना होता है। निर्वाची पदाधिकारियों से उन्होंने कहा कि अपने कर्तव्यों के संबंध में आर.ओ. हैन्डबुक को बार-बार पढ़ें। पारदर्शिता के मदेनजर नाम निर्देशन कार्य का वीडिओग्राफी कराना सुनिश्चित करेंगे साथ हीं अपने कक्ष में सी.सी.टी.वी कैमरा का संस्थापन करेंगे। अभ्यर्थियों के सहायतार्थ हेल्पडेस्क भी संधारित करेंगे। कोविड-19 के संदर्भ में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अद्यतन दिशा निर्देशों के आलोक में कार्यों का निष्पादन करेंगे। नाम निर्देशन के समय अभ्यर्थी द्वारा लिये जाने वाले शपथ के विषय में बताया गया। हिन्दुस्थान समाचार/अजय/चंदा-hindusthansamachar.in