नई शिक्षा नीति से मैकाले शिक्षा नीति का अंत : राठौर
नई शिक्षा नीति से मैकाले शिक्षा नीति का अंत : राठौर
बिहार

नई शिक्षा नीति से मैकाले शिक्षा नीति का अंत : राठौर

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गया, 02 अगस्त(हि.स.) । राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के शिक्षा संकाय की ओर से रविवार को यहाँ एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया । वेबिनार में नई शिक्षा नीति 2020 की बारीकियों और मुख्य बिंदुओं को विभिन्न विद्वानों ने साझा किया । कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता प्रो सी के सलूजा आमंत्रित थे। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि प्रजातांत्रिक पद्धति पर आधारित नई शिक्षा नीति का हमें स्वागत करना चाहिए।उन्होंने नई शिक्षा नीति को प्रजातांत्रिक मूल्यों को समेटे हुए भाषाई स्वत्रंता से जोड़कर बताया कि किस प्रकार यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 (अ) के अनुसार है । उन्होंने बताया कि बच्चों में सीखने की प्रक्रिया और अधिगम को आसान बनाने के लिए इस प्रकार की शिक्षा नीति की हमारे देश में बहुत दिनों से जरूरत थी । लंबे इंतजार के बाद आधारभूत साक्षरता और मल्टी डिसिप्लिनरी अधिगम को इस शिक्षा नीति ने पूरा किया है । पूर्व कुलपति प्रो सी पी एस चौहान ने इस नई शिक्षा नीति को आज की शिक्षा व्यवस्था की जरूरत बताते हुए कहा कि इससे छात्रों में तनाव में कमी आएगी और उनके लिए अधिगम लचीला रहेगा जिससे उनके सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा । प्रो अरबिंद कुमार झा ने बताया कि नई शिक्षा नीति के मूल में भारतीयता है।उन्होंने बताया कि शिक्षण में किस प्रकार से क्रांतिकारी परिवर्तन आने वाला है और यह भारतीय शिक्षा पद्धति को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करेगा । संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो एच सी एस राठौर ने कहा कि आजादी के बाद से इस प्रकार की शिक्षा नीति अब तक नहीं आयी थी और यह समय की जरूरत है । उन्होंने नई शिक्षा नीति के निर्माण में लगे सभी विद्वानों को धन्यवाद देते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने नई शिक्षा नीति को उत्कृष्ट रूप में और सही समय पर लाने का काम किया है और यह आने वाले कई दशकों तक भारतीय शिक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने वाली साबित होगी । उन्होंने इसे राष्ट्रवादी शिक्षा का स्वरूप बताया और कहा कि मैकाले शिक्षा पद्धति का इस नई शिक्षा नीति ने अंत किया है। इसे पूर्णतः भारतीयता से जोड़ा है । संगोष्ठी के निदेशक शिक्षा संकाय के संकायाध्यक्ष प्रो कौशल किशोर ने कहा कि राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश भर से सैकड़ों शोधार्थियों ने शिरकत की है और इस संगोष्ठी से लाभान्वित हुए । प्रतिभागियों के अधिक संख्या में पंजीकरण के कारण उन्होंने इसको सोशल मीडिया के मंच से जोड़ा ताकि नई शिक्षा नीति पर विद्वानों की राय ज्यादा से ज्यादा छात्र समझ सकें । विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो आतिश पराशर ने व्यावसायिक शिक्षा पर अपने विचार रखे और बताया कि देश में पहली बार व्यावसायिक शिक्षा को इतना महत्व देकर कोई नीति आयी है जिसका लाभ निश्चित तौर पर छात्रों को होगा । शिक्षा संकाय की प्रो रेखा अग्रवाल ने विद्यालयी शिक्षा में नई शिक्षा नीति के महत्व को साझा किया। उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति ने प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा के पैटर्न को सर्वसुलभ बनाने का काम किया है । डॉ सनत कुमार शर्मा ने सामाजिक और नैतिक शिक्षा पर नई शिक्षा नीति के प्रभाव पर विस्तार से चर्चा की । कार्यक्रम का संचालन शिक्षा संकाय की सहायक प्राध्यापक डॉ कविता सिंह ने किया । डॉ रविकांत ने संगोष्ठी में धन्यवाद ज्ञापन किया । इस संगोष्ठी में शिक्षा संकाय के सभी प्राध्यापक और सैंकड़ों प्रतिभागियों ने शिरकत की । हिंदुस्थान समाचार/ पंकज कुमार/विभाकर-hindusthansamachar.in