धान व खरीफ की फसल देख खुश हैं किसान, प्रवासी श्रमिकों को दे रहे दुआ
धान व खरीफ की फसल देख खुश हैं किसान, प्रवासी श्रमिकों को दे रहे दुआ
बिहार

धान व खरीफ की फसल देख खुश हैं किसान, प्रवासी श्रमिकों को दे रहे दुआ

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बक्सर,15 सितम्बर (हि.स.)। करोना और आर्थिक मंदी के बीच मौसम की मेहरबानी, प्रवासी श्रमिकों की उपस्थिति ने इस बार धान का कटोरा कहे जाने वाले बक्सर जिला के किसानों के चेहरे पर खुश होने का भरपूर मौक़ा दिया है। इस बार धान और खरीफ की जिले में बम्पर पैदावार होना तय है। जिला कृषि विभाग का कहना है कि जिले में धान की खेती 90 हजार हेक्टेयर भू—भाग पर की गई है तथा 35 हजार हेक्टेयर भूमि पर खरीफ की खेती हुई है जो शत—प्रतिशत सफल। इसका सबसे बड़ा कारण समय-समय पर हुई बारिश तथा बाढ़, सुखाड़ से हुए बचाव और कोरोना को लेकर प्रवासी श्रमिकों की हर गांव में उपलब्धता है। प्रवासी श्रमिकों की बदौलत ही समय से एक माह पूर्व ही पुरवा नक्षत्र में ही धान की बालियों में गोफे आ गये हैं,जबकि अन्य वर्षों में धान की बालियों में गोफे चित्रा नक्षत्र में आते रहे हैं। जिला कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक रामकेवल सिंह का कहना है कि प्रवासी युवाओं की वैज्ञानिक सोंच, विकास के प्रति उनका रुझान और हमारा परामर्श दोनों ही इस बार हमें शत— प्रतिशत लक्ष्य दिला रहा है। खुद जिलाधिकारी ने भी धान की फसलों का मुआयना कर संतोष प्रकट करते हुए कहा कि बाढ़ और सुखाड की स्थिति टल गई है। किसाों ने बिना पम्प चलाए ही पूरी तरह प्रकृति के भरोसे धान और खरीफ की पैदावार की है। हम इनके प्रयासों को ज़ाया नहीं होने देंगे। किसानों की धान फसल को इस बार सरकार द्वारा निर्धारित दर पर शत—प्रतिशत समय से जिला प्रशासन अपने मातहत संसाधनों की बदौलत खरीद और मूल्य का भुगतान करेगा। खरीफ की खेती से जुड़े किसान भी इस बार बाढ़ की विभीषिका से बच गये और मौसम का साथ मिलने से जिले के दियारा क्षेत्र में खरीफ फसलों की भी स्थिति बहुत ही अच्छी है। यहां भी जिले के दियारा इलाके की परती भूमि पर प्रवासी श्रमिकों के योगदान से मक्का, ज्वार समेत सब्जियों की खेती की गई। कारण है कि अब भी शेष जगहों के बनिस्पत बक्सर की मंडियों में सब्जी के भाव नियंत्रण में हैं। प्रवासी मजदूरों को लेकर सिमरी, अर्जुनपुर, मझवारी, केशोपुर के ग्रामीण कहते हैं कि कोरोना के संकट की इस घड़ी में प्रवासी श्रमिकों की मौजूदगी कृषि कार्यों के लिए वरदान साबित हुई, अन्यथा मजदूरों के अभाव में इलाके का एक बड़ा भू—भाग बंजर ही रह जाता था। अपने गांव में अपनों के बीच कम मजदूरी पर भी काम कर खुश रहने वाले प्रवासी श्रमिक प्रायः प्रवास करने की बात मन से निकाल चुके हैं और केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ उठाते हुए कुछ कर गुजरने की ललक में हैं। हाल के दिनों में कृषि अनुसंधान केन्द्रों पर प्रवासी युवा किसानों की मौजूदगी इस बात की गवाह है। हिन्दुस्थान समाचार /अजय मिश्रा/हिमांशु शेखर /विभाकर-hindusthansamachar.in