गोपालगंज में बाढ़ के पानी से 500 गांवों की 5  लाख की आबादी प्रभावित
गोपालगंज में बाढ़ के पानी से 500 गांवों की 5 लाख की आबादी प्रभावित
बिहार

गोपालगंज में बाढ़ के पानी से 500 गांवों की 5 लाख की आबादी प्रभावित

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सरकारी सहायता के आस में है बाढ़ पीड़ित गोपालगंज,27 जुलाई (हि. स.)। सारण तटबंध और रिंग बांध टूटने से गोपालगंज जिले के 5 प्रखण्ड के सैकड़ों गांवों के लोग पिछले चार दिन से बाढ़ का दंश झेल रहे हैं।यहां के लोग अपने ही गांव में कैद हो गए हैं। आलम यह है कि न खाने को आनाज है न पीने के लिए पानी मिल पा रहा है। पानी के बीच घिरे इन बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी बांस के बने मचानों पर किसी तरह कट रही है।बता दें कि बाढ़ प्रभावित अधिकांश गांवों में अब तक न जनप्रतिनिधि पहुंचे हैं और न कोई अधिकारी अब तक इनका हाल लेने आया है।यही वजह है कि यहां रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधा भी नहीं मिल पा रही है। ये लोग शुद्ध पानी, नाव, भोजन, तिरपाल और रहने की व्यवस्था के लिए प्रशासन का आसरा लगाए बैठे हैं।वाल्मीकि बराज से छोड़े गए पानी ने बांध को तोड़ दिया जिससे 5 लाख की आबादी तबाह हो गई है। दरअसल गोपालगंज जिला हमेशा से ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्र रहा है। यहां के लोग बाढ़ की विभीषिका से हमेशा बेघर हुए हैं। इस साल भी गंडक नदी ने तबाही मचानी शुरू कर दी है। वाल्मीकि नगर बैराज से छोड़े गए पानी के बाद दियारा इलाके के कई गांव बाढ़ की चपेट में पहले ही आ गए थे। जिससे लोगों में दहशत का माहौल है। बांध टूटने के बाद रोज नए इलाके के गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से फैलने लगा है। लोग अपने घरों में कैद हो गए हैं।वहीं, सांप -बिच्छू का डर भी लोगों को सता रहा है। बाढ़ के कारण कई गांवों का संपर्क जिला मुख्यालय से टूट गया है। जिला प्रशासन की ओर से सरकारी नाव का इंतजाम किया गया है लेकिन ये नावें बाढ़ प्रभावित गांवों तक नहीं पहुंच सकी हैं।सबसे ज्यादा परेशानी सदर प्रखंड के मेहन्दीय, मशान थाना मकसूदपुर जगिरी टोला, मलाही टोला और रामपुर गांव में है। यहां गांव की सड़कों पर 3 से 4 फुट पानी बह रहा है। कुछ लोग अपने घर में ही कैद हो गए है, तो कुछ लोग अब पलायन करने लगे हैं। तटवर्ती इलाके के निचले हिस्से में बसे 60 गांवों की करीब 40 हजार आबादी पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में है ।बाढ़ पीड़ित रामाशीष सहनी ने अपना दर्द बयान करते हुए बताया कि अब तक उन्हें कोई भी प्रशासनिक सुविधा नहीं मिली है।मांझा प्रखण्ड की निमुईया पंचायत के विशुनपुरा गांव की बात करें तो यहां की स्थिति बाद से बदतर है।लोग भोजन, पानी और दवा के लिए तरस रहे हैं।बिशुनपुर गांव निवासी फूलकुमारी के पास कुछ भी नहीं बचा है। कुचायकोट प्रखण्ड के काला मटिहानीया, रूप सागर सलेमपुर, जमुनिया, गम्हरिया सदर प्रखंड के पथरा, बरईपट्टी, जगरी टोला, खाप ,मकसूदपुर, रामनगर मसान थाना ,माझा प्रखंड के पथरा, गौसिया, धामापाकड़ पुरैना, भैसही, निमुइया बरौली प्रखंड के सिकटिया, सलेमपुर, सिकरिया, सलेमपुर और सिधवलिया प्रखंड के सलेमपुर, बंजरिया अमरपुरा बैकुंठपुर प्रखंड के अमारी, सीतलपुर, सलेमपुर, अदमापुर, मटियारी, प्यारेपुर, आशाखेड़ा मोहम्मदपुर गांव में बाढ़ का पानी तेजी से फैलने लगा है।जानकारों के माने तो वर्ष 2003 के बाद पहली बार गंडक नदी इतनी ज्यादा उफान पर है। इसी प्रकार सिधवलिया,बरौली, बैकुंठपुर प्रखंड के नए 500 गांवों में पानी घुसने से आपाधापी मची है। हिन्दुस्थान समाचार/अखिलानंद/विभाकर-hindusthansamachar.in