खगड़िया में मौत को दावत देकर जीने का सामान जुटा रहे हैं लोग
खगड़िया में मौत को दावत देकर जीने का सामान जुटा रहे हैं लोग
बिहार

खगड़िया में मौत को दावत देकर जीने का सामान जुटा रहे हैं लोग

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खगड़िया, 11 अगस्त (हि.स.)। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लोगों को अपनी जान हथेली पर रखकर नाव की सवारी करनी पड़ रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जिले के 116 गांव बाढ़ प्रभावित हैं लेकिन वास्तविकता में कई ऐसे गांव भी हैं जो सामान्य दिनों में भी हमेशा नदी या नदियों की मृत धारा से घिरे हुए रहते हैं। इन गांव में आवागमन का एकमात्र सहारा नाव ही होता है। जिले के चौथम वृंदावन और अलौली में कई ऐसे गांव हैं जहां के निवासियों को अपनी रोजमर्रा की जरूरत के लिए नाव से समीपवर्ती बाजार आना जाना पड़ता है। हालांकि जिला प्रशासन ने दावा किया है कि वह बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में 32 सरकारी नाव तथा 86 निजी नाव को लोगों के आवागमन के लिए लगाया गया है लेकिन बाढ़ प्रभावित एक लाख से अधिक जनसंख्या के लिए यह व्यवस्था ना काफी है। लोगों को निजी लोगों के नाव के भरोसे ही मनमाना किराया देकर अपने रोजमर्रा की जरूरतों के लिए ऐसे खतरनाक नाव को उपयोग में लाना पड़ता है। पिछले सप्ताह बूढ़ी गंडक नदी के जिस एकनिया घाट पर नौका दुर्घटना हुई वह भी सरकारी तौर पर न तो नाव की व्यवस्था की गई और ना ही निजी नाव को सरकारी अधिकारियों की निगरानी में परिचालन की अनुमति दी गई है। इस दुर्घटना में 10 लोगों के शव बरामद हुए, कुछ अभी भी लापता है। चौथम प्रखंड अन्तर्गत भरना मुसहरी महादलित टोला में लोगों को छोटी नाव पर सरकारी राशन लेने अग्रहन गांव जाना पड़ता है। ऐसे कई गांव हैं जहां लोगों को राशन लेने सूदूरवर्ती गांव नौका यात्रा करके डीलर के पास जाना पड़ता है। समय रहते यदि जिला प्रशासन बड़े और सुरक्षित नाव की व्यवस्था नहीं करता है तो कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है। डीएम आलोक रंजन घोष ने इस समस्या को संज्ञान में लेते हुए अंचल अधिकारी को आवश्यक व्यवस्था करने का आदेश दिया है। हिन्दुस्थान समाचार/ अजिताभ/चंदा-hindusthansamachar.in