कोरोना मरीजों की जांच और इलाज में लापरवाही  पर राज्य सरकार से जवाब तलब
कोरोना मरीजों की जांच और इलाज में लापरवाही पर राज्य सरकार से जवाब तलब
बिहार

कोरोना मरीजों की जांच और इलाज में लापरवाही पर राज्य सरकार से जवाब तलब

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पटना. 24 जुलाई (हि .स.) .राजधानी पटना समेत पूरे राज्य में कॅरोना के बढ़ते संक्रमण और इससे प्रभावित मरीजों की जांच और उनके इलाज की लचर व्य स्था से नाराज पटना हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से 7 अगस्त तक जबाब तलब किया है. कोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि इस मामले में वह 7 अगस्त तक विस्तृत शपथ पत्र दायर कर कोर्ट को इस मामले की पूरी स्थिति से अवगत कराएं. मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश एस कुमार की खंडपीठ ने दिनेश कुमार सिंह की लोकहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को यह निर्देश दिया. कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि पूरे राज्य में कितने कोरोना मरीजों की अब तक जांच की गई है और कितने मरीजों की जांच अभी की जानी है ,राज्य में कोरोना अस्पताल के रूप में कितने अस्पताल को नोटिफाई किया गया है, राज्य में कितने आइसोलेशन सेंटर हैं,उन सेंटरों में मरीजों को क्या -क्या सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं ? कोर्ट ने यह भी पूछा है कि कोविड मरीजों के लिए बनाए गए अस्पतालों में डॉक्टरों और पारा मेडिकल कर्मियों की संख्या कितनी है? कोविड मरीजों की जांच एवं इलाज के लिये बनाये गए अस्पतालों में कितने ऑक्सीजन सिलेंडर , कितने वेंटीलेटर उपलब्ध हैं तथा इनकी संख्या कितनी है ? कोरोना से मृत व्यक्ति की लाश के अंतिम संस्कार के लिए सरकार क्या तरीका अपना रही है? राज्य में कितने लोगों की अब तक कोरोना जांच हुई है और उसमें कितने लोगों में कोरोना का संक्रमण पाया गया है.? क्या कारण है कि जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक के अस्पतालों में कोरोना से प्रभावित मरीजों को भर्ती करने में अस्पताल प्रशासन आनाकानी कर रहा है?अभी तक अस्पतालों और सरकारी लापरवाही के चलते कितने कोरोना प्रभावित मरीजों की मृत्यु की सूचना सरकार के पास उपलब्ध है ? इन सब बातों की पूरी जानकारी 7 अगस्त तक शपथ पत्र के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव उपलब्ध करावें. कोर्ट को याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि बिहार में कोरोना मरीजों की संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है . कोरोना प्रभावित मरीज या उसके लक्षण से प्रभावित मरीज जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक के अस्पतालों में जांच एवं इलाज के लिए घूमते रहते हैं, लेकिन कहीं भी उन लोगों की जांच और इलाज नहीं हो पा रहा है यही कारण है कि कई लोगों की मृत्यु समय पर जांच और इलाज नहीं हो पाने के कारण हो जा रही है. कोरोना प्रभावित मरीजों को अस्पतालों में भर्ती नहीं किया जा रहा है जिसके चलते अस्पताल के गेट पर या सड़क पर ही मरीज की मृत्यु हो जा रही है. राजधानी पटना के एम्स, पीएमसीएच, एनएमसीएच जैसे बड़े अस्पतालों में व्याप्त अव्यवस्था का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है. कोर्ट को याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि कोरोना की जांच के लिए रैपिड एंटीजन टेस्ट, रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट, मोलिकुलर टेस्ट , और सेरो सर्वे नहीं किया जा रहा है. इतना ही नहीं राज्य सरकार ने ब्लड प्लाज्मा बैंक भी अब तक स्थापित नहीं किया है. कोविड मरीजों के लिए अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में बेड उपलब्ध नहीं है .कोरोना प्रभावित मरीजों की मृत्यु हो जाने पर उनके शव को अंतिम संस्कार करने के लिए बनाए गए दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है. इन मरीजों की मृत्यु हो जाने पर उसे गंगा में प्रवाहित कर दिया जा रहा है जिससे उस इलाके के अगल -बगल रहने वाले लोग काफी सशंकित रह रहे हैं . हिन्दुस्थान समाचार /द्विवेदी सुरेन्द्र/विभाकर-hindusthansamachar.in