केंद्रीय विश्वविद्यालय में हिन्दी पखवाड़े का  औपचारिक समापन
केंद्रीय विश्वविद्यालय में हिन्दी पखवाड़े का औपचारिक समापन
बिहार

केंद्रीय विश्वविद्यालय में हिन्दी पखवाड़े का औपचारिक समापन

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गया, 30 सितंबर (हि.स.)। दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) में आयोजित 15 दिवसीय हिंदी पखवाड़े का बुधवार को औपचारिक समापन हो गया। कुलपति प्रोफेसर हरिश्चंद्र सिंह राठौर एवं कुलसचिव कर्नल राजीव कुमार सिंह की देखरेख में हिंदी पखवाड़े का सफलतापूर्वक आयोजन हुआ। प्रतीश कुमार दास, उपकुलसचिव सह राजभाषा प्रकोष्ठ प्रभारी ने बताया कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस को देखते हुए एवं शिक्षा मंत्रालय के निदेशानुसार इस वर्ष पखवाड़े के सारे कार्यक्रम ऑनलाइन माध्यम से ही आयोजित किए गए। उन्होंने बताया कि पखवाड़े के दौरान आयोजित टिप्पण प्रारूपण प्रतियोगिता में विनोद कुमार, सहायक, सागर कुमार वर्मा, सहायक, धीरेन्द्र सिंह, अनुभाग अधिकारी, धनजी प्रसाद, अवर श्रेणी लिपिक का क्रमश: प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। पखवाड़े के दौरान फाइलों पर मूल रूप में टिप्पण एवं प्रारूपण प्रतियोगिता में धर्मेन्द्र सिंह, नवीन कुमार कन्नौजिया, अमित कुमार एवं अनुरोध कुमार को क्रमश: प्रथम, द्वितीय, तृतीय एवं सांत्वना पुरस्कार हेतु नामित किया गया है। स्वरचित कविता पाठ प्रतियोगिता में संकाय वर्ग में प्रो. अतीश पराशर, डीन, स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन एंड मीडिया को प्रथम और डा. रविकांत, सह प्राध्यापक, स्कूल ऑफ एजुकेशन को द्वितीय पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है।जबकि गैर-शैक्षणिक वर्ग में प्रथम पुरस्कार लालकृष्ण विवेकानंद, अनुभाग अधिकारी एवं द्वितीय पुरस्कार तेज नारायण, अवर श्रेणी लिपिक को तथा छात्र वर्ग में पुरुषोत्तम कुमार, छात्र, पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग को प्रथम पुरस्कार हेतु चयनित किया गया है। स्वरचित कविता पाठ कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने अपनी स्वरचित कविताओं के वाचन से सभी को मोहित किया। निर्णायक मंडली में कुलसचिव कर्नल राजीव कुमार सिंह (सेवानिवृत्त), हिन्दी विभाग के संकाय एवं लब्धप्रतिष्ठित कवि डा.अनुज लुगुन तथा उपकुलसचिव सह राजभाषा प्रकोष्ठ प्रभारी प्रतीश कुमार दास शामिल थे। कार्यक्रम में ऑनलाइन माध्यम से छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो.अतीश पराशर, मुख्य कुलानुशासक प्रो. कौशल किशोर, वित्त अधिकारी गिरीश रंजन, चिकित्सा पदाधिकारी डा. विवेक नारायण एवं बड़ी संख्या में संकायगण, अधिकारीगण एवं कर्मचारीगण जुड़े हुए थे। हिंदुस्थान समाचार/ पंकज कुमार/विभाकर-hindusthansamachar.in