पूसीरे ने कोरोना काल में राज्यों को मुहैया कराई आवश्यक सहायता: जीएम

पूसीरे ने कोरोना काल में राज्यों को मुहैया कराई आवश्यक सहायता: जीएम
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गुवाहाटी, 17 जून (हि.स.)। पूर्वोत्तर सीमा रेल (पूसीरे) के महाप्रबंधक अंशुल गुप्ता ने गुरुवार को कहा कि कोरोना महामारी के इस चुनौतीपूर्ण समय के दौरान पूसीरे तथा भारतीय रेल ने सर्वांगीण रूप से उपाय किये। महाप्रबंधक गुप्ता गुरुवार को पूसीरे मुख्यालय मालीगांव से एक वर्चुअली पत्रकारवार्ता को संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि कोरोना के प्रसार को रोकने के क्रम में पूसीरे राज्य सरकारों की स्वास्थ्य देखभाल संबंधित प्रयासों की पूर्ति के लिए सभी तरह के प्रयास कर रही है। किए गए उपायों में कोरोना मरीजों के उपचार के लिए वर्तमान रेलवे अस्पतालों को व्यवस्थित करना, कोरोना की जरूरतों को पूरा करने के लिए अस्पतालों में ऑक्सीजन संयंत्रों की स्थापना, अपने कर्मियों के लिए टीकाकरण अभियानों का आयोजन आदि शामिल है। पूसीरे कुल 354 बिस्तरों की सुविधा के साथ अपने 6 रेलवे अस्पतालों में कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार की सुविधाएं प्रदान की है। इन सभी स्पेशल वार्डों में कोरोना संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक सभी मूलभूत स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं उपलब्ध हैं। चालू वर्ष के अप्रैल से इन अस्पतालों में एक हजार 250 से भी अधिक मरीजों का उपचार किया गया है। पूसीरे के विभिन्न अस्पतालों में सात ऑक्सीजन संयंत्रों की स्थापना करने की भी योजना बनाई गई है। सम्पूर्ण पूसीरे क्षेत्र में 19 टीकाकरण केंद्र संचालित हैं। पूसीरे के करीब 95 प्रतिशत रेसुब तथा 72 प्रतिशत स्वास्थ्य कर्मियों को कोरोना टीका की दूसरी खुराक दे दी गई है। लगभग 64 प्रतिशत सेवारत अन्य कर्मचारियों को भी प्रथम खुराक दे दी गई है। भारतीय रेल जीवन रक्षक ऑक्सीजन के तेज परिवहन के लिए ग्रीन कॉरिडोर सृजित कर जरूरतमंद राज्यों को राहत पहुंचाने के लिए ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनें चला रही है। प्रथम ऑक्सीजन एक्सप्रेस 19 अप्रैल को मुम्बई से वाइजैग के बीच चलाई गई। गत दिवस तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 440 ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनें विभिन्न राज्यों में 31 हजार, 704 एमटी एलएमओ की आपूर्ति कर चुकी है। सात ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों द्वारा असम में अब तक 560 एमटी एलएमओ की आपूर्ति की जा चुकी है। इस महामारी के दौरान, अर्थव्यवस्था को बहाल रखने, आवश्यक तथा अन्य सामग्रियों की मांग को पूरा करने के लिए कई तरह की बाधाओं के बावजूद भारतीय रेल द्वारा मई में अब तक की सर्वाधिक 114.82 एमटी की लोडिंग की गई है। यह मई, 2019 के पिछले सर्वश्रेष्ठ 104.65 एमटी लोडिंग की तुलना में 9.7 प्रतिशत अधिक है। पूसीरे पिछले वर्ष मई तक 0.802 एमटी की तुलना में इस वर्ष इसी अवधि तक 1.480 एमटी की लोडिंग की है। यह 84.5 की वृद्धि है। पूसीरे द्वारा पिछले वर्ष 9731 रेकों की तुलना में वर्ष 2020-21 के दौरान 11 हजार, 659 फ्रेट रेकों का निर्गमन किया गया,जो 20 प्रतिशत अधिक है। पिछले वर्ष 708 रेकों की तुलना में इस वर्ष मई के दौरान 60.31 प्रतिशत वृद्धि के साथ एक हजार, 135 रेक अनलोड किए गए। जून में अब तक मालगाड़ियों की औसत गति पिछले वर्ष 36.10 किमी प्रति घंटे से बढ़ाकर 44.52 किमी प्रति घंटे की गई है। (+23.32%). गुड्स ट्रैफिक की हैंडलिंग के लिए 19 नए स्टेशन खोले गए हैं,पार्सल ट्रैफिक की हैंडलिंग के लिए 12 नए स्टेशन खोले गए हैं तथा अर्थव्यवस्था की प्रगति और लोडिंग व अनलोडिंग में शामिल श्रमिकों की आय सृजन करने के लिए 23 गुड्स शेडों में चौबीस घंटे लोडिंग व अनलोडिंग की सुविधाएं प्रदान की गई हैं। पूसीरे द्वारा 103 किसान रेल चलाई जा चुकी है, जिसमें अन्य रेलवे से आने वाली 64 किसान रेल शामिल है। पूर्वोत्तर के किसानों के लिए सस्ता तथा तेज परिवहन के समाधान प्रदान करने के लिए पूसीरे द्वारा 39 किसान रेल चलाई गई ताकि वे अपने स्थानीय उत्पादों को भारत के वृहत्तर बाजारों तथा विदेशों में आसानी से भेज सके। कोरोना संबंधी प्रतिबंधों के बावजूद हमारे क्षेत्र में जुलाई के मध्य तक करीब 72 प्रतिशत यात्री ट्रेन सेवाओं को पुनः आरम्भ करने की योजना बनाई गई है। अत्यंत जरूरी यात्रा करने के इच्छुक यात्रियों के लिए वर्तमान में प्रतिदिन 49 जोड़ी स्पेशल मेल व एक्सप्रेस ट्रेनें तथा पांच जोड़ी लोकल पैसेंजर ट्रेनें चलाई जा रही हैं। 21 जोड़ी स्पेशल व मेल एक्सप्रेस ट्रेनों के परिचालन की अधिसूचना जारी कर दी गई है। भारतीय रेल में प्रतिदिन औसतन 889 स्पेशल व मेल एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। संबंधित राज्य सरकारों के साथ परामर्श कर निकट भविष्य में और ट्रेनें चलाने के लिए परिस्थिति पर नजर रखी जा रही है। पूसीरे के महाप्रबंधक ने इस दौरान भारत सरकार द्वारा भारतीय रेल को पांच मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के आवंटन के बारे में भी जानकारी साझा की। यह ट्रेन परिचालन में सुरक्षा तथा संरक्षा को बढ़ाने में मददगार साबित होगी तथा रेलवे को ट्रेन कोलिजन एवॉयडेंस सिस्टम (टीसीएएस) आदि जैसी नवीनतम स्वदेशी तकनीक के प्रयोग के लिए सक्षम बनाएगी। हिन्दुस्थान समाचार/ अरविंद