फकिराग्राम चरख पूजा का समापन आज। 

फकिराग्राम चरख पूजा का समापन आज। 
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फकीराग्राम में चरक पूजा संपन्न कोकराझार (असम), 14 अप्रैल (हि.स.)। कोकराझार जिला के फकीराग्राम थाना क्षेत्र के राभापारा गांव में बुधवार को चरक पूजा का संपन्न हो गया। ज्ञात हो की पूजा के नियमों के अनुसार पिछले एक सप्ताह से स्थानीय इलाके के प्रत्येक घर से एक व्यक्ति सन्यासी (साधू) का रूप धारण कर सांसारिक मोह-माया से दूर होकर भिक्षा मांग कर अपना जीवन यापन करते है। बैसाख महीने के दो दिन पहले रात को 12 बजे स्थानीय श्मशान घाट पर तांत्रिक के द्वारा 15 जगह भोग लगाकर शिव की आराधना की जाती है। बैसाख महीने के अंतिम दिन सुबह से विभिन्न आयोजनों के जरिये चरक पूजा संपन्न हुआ। शाम लगभग 05 बजे से राभापारा के चरक खेल मैदान में फकीराग्राम के विभिन्न क्षेत्रों एवं उसके आसपास के जिलों से भी पूजा में हिस्सा लेने के लिए काफी संख्या में लोग पहुंचे थे। समापन कार्यक्रम के दौरान विभिन्न तांत्रिक विद्या का नजारा देखने को मिल। इस दौरान कहीं मां काली का रूप धारण किये तलवार लेकर श्रद्धालुओं को घूमते, नाचते देखे गये तो कहीं देवों के देव महा देव को अपने भूत-पिसाचों के साथ नाचते देखा गया। बच्चों से लेकर बूढ़े तक धारदार तलवार पर चढ़कर घूमते नजर आये, कुछ तो अपनी जीभ में लोहे की सिक (पतला तार) डाल के घूमते नजर आये। अंत में सभी भक्तों का इंतजार तब ख़त्म हुआ जब एक व्यक्ति के शरीर को मछली मारने वाले बड़े कांटे में फंसाकर उल्टा लटकाकर घुमाया जाने लगा। पूरा इलाका देव के देव माह देव के जयकारे से गूंज उठा। उक्त कार्यक्रम में शामिल होने के लिए फकीराग्राम थाना प्रभारी अजय कुमार साहा, राभापारा गांवबूढ़ा पूर्ण सरकार सहित विभिन्न क्षेत्रों से आये बुद्धजीवी मौजूद थे। आयोजक समिति के प्रमुख प्रदीप सरकार ने मीडिया को बताया कि यह पूजा गत वर्ष 1986 से इसी नियमानुसार आयोजित किया जाता है। इस पूजा के साथ स्थानीय लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। जिसे दिखने के लिए काफी दूर-दूर से लोग आते हैं। हिन्दुस्थान समाचार /किशोर/ अरविंद