जनता के भरोसे की खातिर मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर में कसम खाएंगे कांग्रेसी उम्मीदवार

जनता के भरोसे की खातिर मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर में कसम खाएंगे कांग्रेसी उम्मीदवार
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गुवाहाटी, 24 मार्च (हि.स.)। घोषणापत्र के बाद गारंटी और गारंटी के बाद अब कसम खाने की नौबत कांग्रेस नेताओं के सामने आ गई है। गुरुवार को कांग्रेस के वे सभी 43 उम्मीदवार अपने-अपने इलाके के मंदिरों, नामघरों, मस्जिद, गिरजाघरों आदि में जाकर कसम खाएंगे कि चुनाव जीतने के साथ-साथ चुनाव के दौरान कांग्रेस पार्टी द्वारा दी गई पांच गारंटियों को पूरा करने के कार्य में लग जाएंगे। यह जानकारी बुधवार को राजधानी के एबीसी स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रो. गौरव वल्लभ ने दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के उम्मीदवार कसमें खाकर लोगों को विश्वास दिलाएंगे कि चुनाव के दौरान दी गयी गारंटियों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। सवाल यह उठता है कि कांग्रेस के नेताओं को गारंटी देने के बावजूद कसम खाने की नौबत क्यों आ रही है? सर्व विदित है कि कांग्रेस पार्टी प्रत्येक वर्ष चुनावों में अपने घोषणापत्र जारी करती दी थी। इस बार असम विधानसभा चुनाव में घोषणा पत्र जारी किए जाने के बाद गारंटी दी गई। गारंटी कार्ड भी बांटे गए। लेकिन, कांग्रेस के नेताओं को आशंका है कि राज्य की जनता उनकी गारंटी ऊपर विश्वास नहीं कर रही है। यही वजह है कि आखिरकार उन्होंने मंदिरों, मस्जिदों आदि में जाकर उम्मीदवारों के शपथ लेने का कार्यक्रम तय किया। पत्रकार सम्मेलन के दौरान कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रमोद तिवारी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि यह पार्टी बेचूराम एंड कंपनी है। इस कंपनी के चेयरमैन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा इसके प्रबंध निदेशक गृहमंत्री अमित शाह हैं। जबकि, उन्होंने अंबानी और अडानी को इस कंपनी का बेनिफिशियरी बताते हुए भाजपा पर तंज कसा कि यह हम दो हमारे दो की पार्टी है। प्रमोद तिवारी ने कहा कि भाजपा 10 संकल्प ले रही है, लेकिन इनके संकल्प का कोई भरोसा नहींहै। सुबह कुछ और संकल्प लेते हैं और शाम को कुछ और। वहीं, दूसरी ओर हम गारंटी दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने मुख्यमंत्री पर भी भरोसा नहीं कर रही है। यही वजह है कि वह सर्वानंद सोनेवाल को फिर से मुख्यमंत्री नहीं घोषित कर रही है। जब स्वयं भाजपा को ही अपने मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं है तो राज्य की जनता कहां से भरोसा कर सकेगी। वहीं, प्रोफेसर गौरव वल्लभ ने कहा कि भाजपा को संकल्प पत्र की जगह माफीनामा चुनाव के मौके पर पेश करना चाहिए। भाजपा सीएए को लेकर तमिलनाडु में इसे लागू नहीं करने की बात कह रही है। बंगाल में प्रधानमंत्री मोदी कह रहे हैं कि सरकार बनने के साथ ही कैबिनेट की पहली बैठक में सीएए को लागू करने की घोषणा की जाएगी। वहीं, असम में इस मुद्दे पर पूरी भाजपा चुप है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस उन्हीं मुद्दों पर भाजपा को घेरने में लगी गई है जिन मुद्दे पर खुद उनके पास कोई जवाब नहीं है। मंगलवार को कांग्रेस के पत्रकार सम्मेलन के दौरान महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण से दैनिक अकेला द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब से कांग्रेस की दो मुंही नीति साबित हो जाती है। अशोक चौहान से पूछा गया कि उनकी पार्टी असम में सरकार बनने की स्थिति में 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त देने की गारंटी दे रहे हैं, महाराष्ट्र में उनकी सरकार चल रही है क्या महाराष्ट्र में 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त दी जा रही है? या भविष्य में 200 यूनिट तक बिजली का बिल माफ करने की कांग्रेस की कोई योजना है। इस सवाल के जवाब में न सिर्फ कांग्रेस नेता अशोक चह्वाण भड़क गए, बल्कि उन्होंने कहा कि यह असम का चुनाव अलग है, यहां असम के मुद्दे अलग हैं। भाजपा पर अलग-अलग राज्यों में एक ही मुद्दे पर अलग-अलग नीति अपनाने का आरोप लगा रहे कांग्रेस नेता के जवाब से यह साबित हो रहा है कि कांग्रेस चुनाव के दौरान असम की जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। वहीं, आज के पत्रकार सम्मेलन के दौरान चाय मजदूरों की दैनिक मजदूरी 365 रुपये करने की कांग्रेस की गारंटी से संबंधित पूछे गए सवाल पर भी कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव बल्लव ने गोल-मटोल उत्तर दिए। दैनिक अकेला द्वारा उनसे प्रश्न पूछा गया कि चाय मजदूरों की दैनिक मजदूरी बढ़ाने का मुद्दा चाय कंपनियों से जुड़ा है। ऐसे में सरकार दैनिक मजदूरी कैसे बढ़ा सकती है। कांग्रेस की यदि सरकार बनती है तो क्या सरकार प्रत्येक दिन की बढ़ी हुई मजदूरी के लिए चाय कंपनियों को अलग से सब्सिडी देगी? इसका सटीक उत्तर देने में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता विफल रहे। चाहे वह भ्रष्टाचार का मुद्दा हो या फिर प्रशासनिक और शासन की विफलता का- कांग्रेस की 15 वर्षों तक असम में रही सरकार के सारे रिकॉर्ड असम की जनता के सामने हैं। चाय मजदूरों की दैनिक मजदूरी का मुद्दा इन पांच वर्षों का नहीं है। बल्कि, अंग्रेजी हुकूमत के दिनों से ही चल रहा है। चाय कंपनी के मालिक और चाय कंपनी के मजदूरों के बीच इसको लेकर हमेशा ही तनातनी रही है। कांग्रेस नेता पवन सिंह घटवार चाय मजदूर संघ की राजनीति करके केंद्रीय मंत्री तक बन गए, लेकिन चाय मजदूरों की समस्या जस की तस बनी रही। यही कारण है कि आज चाहे वह चाय मजदूर हों या राज्य की महिलाएं या अन्य मतदाता- कोई भी कांग्रेस की गारंटी पर भरोसा नहीं कर रहा है। और, आज कांग्रेस उम्मीदवारों को मंदिरों, मस्जिदों में जाकर अपना वादा पूरा करने की कसमें खाने की जरूरत पड़ रही है। संविधान की कसमें खाकर इनके नेता इतने वर्षों से क्या करते रहे हैं यह जनता ने देखा है। अब देखना यह है कि मंदिरों, मस्जिदों में कांग्रेस उम्मीदवारों के कसम खाने का राज्य के मतदाता कितना भरोसा करते हैं। हिन्दुस्थान समाचार/ श्रीप्रकाश/ अरविंद

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