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असम

गुवाहाटी में मनायी गयी असम के मीडिया की 175वीं वर्षगांठ

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गुवाहाटी, 01 फरवरी (हि.स.)। असम की मीडिया ने 175 वर्ष पूरे कर लिये हैं। रविवार को 175 साल पहले असमिया भाषा का पहला समाचार पत्र पहली बार ऊपरी असम के शिवसागर जिले से एक अमेरिकन मिशनरी नाथन ब्राउन द्वारा प्रकाशित किया गया था। समाचार पत्र की 175वीं वर्षगांठ के अवसर पर गुवाहाटी के पान बाजार स्थित इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स के प्रेक्षागृह में रविवार को एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। मल्टी कल्चरल एजुकेशनल डेवलपमेंट की पहल पर आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन इंडियन इंस्टीट्यूशन ऑफ मास कम्युनिकेशन के प्राचार्य प्रो संजय द्विवेदी ने किया। कार्यक्रम के उद्घाटन भाषण में उन्होंने 175 साल पहले उपरी असम के शिवसागर जिला में अमेरिकन मिशनरी नाथन ब्रॉउन द्वारा जिस प्रकार प्रतिकूल परिस्थिति से लड़ते हुए असम में प्रथम असमिया भाषा का समाचार पत्र प्रकाशित किया उस पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने असम के महान मनीषी डॉ भूपेन हजारिका, महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव, माधवदेव, वीर लचित बरफुकन, चाउलूंग चुकाफा का उल्लेख करते हुए कहा कि असमिया भाषा के विकास के लिए अमेरिकन बैपटिस्ट मिशनरी, लक्ष्मीनाथ बेजबरुवा, कवि नीलमनी फूकन, बिनोद शर्मा, पद्मनाथ गोहांई बरुवा सहित अन्य कई असमिया कवि, साहित्यकारों काफी प्रयास किए थे। उन्होंने दी असम ट्रिब्यून नामक अंग्रेजी अखबार का उल्लेख करते हुए कहा कि 195 साल पहले एक हिंदी भाषा का अखबार कोलकाता से प्रकाशित किया जाता था। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि उपरी असम के डिब्रूगढ़ से सन 1963 में एक हिंदी अखबार प्रकाशित किया गया था। इसके साथ ही उन्होंने हाल के दिनों में डिजिटल मीडिया की भूमिका पर विस्तृत रूप से चर्चा की। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया आज प्रमुख भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा डिजिटल मीडिया द्वारा बहुत कम समय में लोग किसी भी समय में किसी भी जगह से देश विदेश के समाचार प्राप्त कर सकते हैं। इस कार्यक्रम में आउनीआटी सत्र (मठ) के सत्राधिकार पितांबर देव गोस्वामी ने भी असमिया समाचार पत्र के बारे में चर्चा की। उन्होंने कहा कि सन 1871 में आउनीआटी सत्र के सत्राधिकार देवदत्त गोस्वामी ने "असम विलासिनी" नामक एक समाचार पत्र प्रकाशित किया था। उन्होंने उक्त समाचार पत्र के संबंध में विस्तृत रूप से चर्चा की। गुवाहाटी के बैपटिस्ट चर्च के पेस्टर अजीजुर हक ने असमिया भाषा के उन्नति तथा विकास के लिए क्रिश्चियन मिशनरी के योगदान के बारे में विस्तृत रूप से अपने विचार व्यक्त किये। असमिया मीडिया की 175वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक स्मारिका का विमोचन किया गया। साथ ही डॉ सुनील पवन बरुवा के "प्रेस इन असम ओरिजिन एंड डेवलपमेंट" नामक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। हिन्दुस्थान समाचार/ देबोजानी/ अरविंद-hindusthansamachar.in